
नई दिल्ली/बेंगलुरु, 29 जुलाई . कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार ने तमिलनाडु के अपने समकक्ष सी. जोसेफ विजय को कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया है और राज्य में पानी की मौजूदा स्थिति का खुद जायजा लेने के लिए उन्हें हेलीकॉप्टर से दौरा कराने की पेशकश की है.
इस बीच, बेंगलुरु के विधान सौधा में कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के बीच कावेरी जल विवाद पर एक हाई-लेवल द्विपक्षीय बैठक की तैयारी चल रही है. यह बैठक 3 अगस्त को दोपहर 2 बजे होनी है, जिसकी पुष्टि शीर्ष सूत्रों ने की है.
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री विजय से हमारे कावेरी कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति देखने का अनुरोध किया है. मैंने उन्हें बताया है कि जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर का इंतजाम भी किया जाएगा ताकि वह जमीनी हकीकत का खुद जायजा ले सकें.”
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजय ने कावेरी मुद्दे पर बातचीत करने की इच्छा जताई थी और औपचारिक पत्र और टेलीफोन पर बातचीत के जरिए अपनी दिलचस्पी जाहिर की थी.
शिवकुमार के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है और नदी जल विवाद पर दोनों राज्यों के बीच संभावित बैठक के बारे में उनसे फोन पर बात भी की है.
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री विजय ने मेरे साथ बातचीत करने में दिलचस्पी दिखाई है. उन्होंने हमारे मुख्य सचिव को पत्र लिखा है और मुझसे टेलीफोन पर बात भी की है. हमने उन्हें एक साथी मुख्यमंत्री के तौर पर सम्मान दिया है और बातचीत के लिए आमंत्रित किया है.”
पड़ोसी राज्यों के बीच अच्छे संबंधों की जरूरत पर जोर देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जिम्मेदारी है कि वह आने वाले गणमान्य व्यक्तियों का उचित सम्मान के साथ स्वागत करे.
उन्होंने कहा, “हमारे राज्य में आने वाले किसी भी मेहमान का सम्मान के साथ स्वागत करना हमारा कर्तव्य है, इसलिए मैंने उन्हें आने के लिए आमंत्रित किया है, और सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं.”
शिवकुमार ने कहा कि तमिलनाडु के नेतृत्व के लिए कर्नाटक के कावेरी बेसिन की वास्तविक स्थितियों को समझना जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य बारिश की भारी कमी से जूझ रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्हें स्थिति का खुद अनुभव करना चाहिए. देखते हैं कि जमीनी हकीकत देखने के बाद वह क्या फैसला लेते हैं.”
उन्होंने कहा कि अगर यह दौरा होता है, तो इससे संवेदनशील कावेरी मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच बेहतर समझ और सद्भाव बनाने में मदद मिल सकती है.
शिवकुमार ने आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि उनके मन में क्या है, लेकिन उन्होंने हमसे मिलने में दिलचस्पी दिखाई है, इसलिए उन्हें आमंत्रित करना हमारी जिम्मेदारी है. उन्हें आने दें, और हम इस मामले पर चर्चा करेंगे.”
कावेरी बेसिन में इस साल बारिश की भारी कमी के बावजूद, कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया है. इसके बाद कावेरी जल-बंटवारे के विवाद को लेकर तनाव बढ़ गया है और इसी बीच यह घटनाक्रम सामने आया है.
इस बीच, 3 अगस्त को होने वाली बैठक विधान सौधा की तीसरी मंजिल पर बने कॉन्फ्रेंस हॉल में होगी. उम्मीद है कि इसमें मुख्यमंत्री शिवकुमार और विजय, दोनों राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं, जिनमें सफाई का काम, लाइटिंग और एयर-कंडीशनिंग सिस्टम की जांच और कार्यक्रम से पहले फर्श को बदलने की संभावना जैसी चीजें शामिल हैं.
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक दशक से अधिक समय में कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारों के बीच पहली सीधी द्विपक्षीय बातचीत होगी.
दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच ऐसी पिछली बैठक नवंबर 2012 में बेंगलुरु में हुई थी, जिसका मकसद जल-बंटवारे के विवाद को सुलझाना था, लेकिन उससे कोई सहमति नहीं बन पाई थी.
कर्नाटक सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह सीडब्ल्यूआरसी के निर्देश को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष चुनौती देगी. सरकार का कहना है कि जलाशय में पानी का सीमित भंडार होने और कई जिलों में पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता के कारण वह पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है.
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एससीएच/डीकेपी