
नई दिल्ली, 20 अगस्त . केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. यह अपराधी 2009 में संसद में नौकरी चाहने वाले एक उम्मीदवार से लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बनकर 50,000 रुपए की रिश्वत लेने के मामले में शामिल था.
इसी को लेकर सीबीआई ने एक बयान में कहा कि बुधवार को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार किए गए जितेंद्र पाठक को ट्रायल कोर्ट ने 2016 में ‘घोषित अपराधी’ करार दिया था. यह कार्रवाई मामले में एफआईआर दर्ज होने के लगभग सात वर्ष बाद की गई थी.
सीबीआई ने 13 जुलाई 2009 को पाठक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. उन पर एक प्राइवेट व्यक्ति को 50,000 रुपए लेकर संसद में नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप था.
सीबीआई ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद एक अन्य आरोपी के साथ उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. ट्रायल के दौरान दिसंबर 2009 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी पाठक कभी कोर्ट में पेश नहीं हुआ.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा, “इसके बाद ट्रायल के दौरान आरोपी का पता लगाने के लिए लगातार और सघन प्रयास किए गए, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका.”
सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को पाठक को ‘घोषित अपराधी’ करार दिया. सीबीआई ने बताया कि फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान मिली जानकारी से पता चला कि आरोपी पाठक लुधियाना में छिपा हुआ था.
सीबीआई ने टेक्निकल एनालिसिस की मदद से एक सटीक ऑपरेशन चलाया और बुधवार को लुधियाना से घोषित अपराधी पाठक को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया.
एक अलग मामले में सीबीआई ने बुधवार को हरियाणा के पानीपत में जॉइंट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के ऑफिस में असिस्टेंट डीजीएफटी को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया.
आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से 30,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी. यह रिश्वत शिकायतकर्ता के क्लाइंट से जुड़ी एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) ऑथराइजेशन फाइल की कमियों को दूर करने और उसे प्रोसेस करने के लिए मांगी गई थी.
सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी सरकारी कर्मचारी को शिकायतकर्ता से 30,000 रुपए की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया.
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डीके/डीकेपी