
नई दिल्ली, 22 सितंबर . केंद्र सरकार ने Supreme Court को बताया है कि जारी सुधारों के तहत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को फंक्शनल-वर्टिकल स्ट्रक्चर, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति और खास प्रोफेशनल पदों के निर्माण के जरिए मजबूत किया जा रहा है.
एनटीए के कामकाज में सुधार से जुड़ी याचिकाओं पर Supreme Court में दायर एक अतिरिक्त हलफनामे में, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि अगस्त 2026 में परीक्षा संस्था में कुल 14 अधिकारियों को तैनात किया गया था. इनमें एक संयुक्त सचिव, चार निदेशक, एक संयुक्त निदेशक, दो उप सचिव, दो अवर सचिव, दो अनुभाग अधिकारी और दो सहायक अनुभाग अधिकारी शामिल थे.
यह हलफनामा Supreme Court के उस आदेश के पालन में दायर किया गया था जिसमें शिक्षा मंत्रालय को विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति (एचएलसीई), जिसके प्रमुख इसरो के पूर्व चेयरमैन के राधाकृष्णन हैं, की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया का विवरण रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया था.
केंद्र सरकार ने कहा कि एनटीए को “फंक्शनल-वर्टिकल स्ट्रक्चर” (कार्यात्मक-ऊर्ध्वाधर संरचना) में पुनर्गठित किया जा रहा है ताकि खास क्षेत्रों में क्षमता निर्माण किया जा सके. यह पुरानी व्यवस्था की जगह लेगा जिसमें कर्मचारियों को परीक्षा-वार वर्टिकल में तैनात किया जाता था.
हलफनामे में कहा गया, “फंक्शनल-वर्टिकल स्ट्रक्चर क्षमता के हर मुख्य क्षेत्र में खास क्षमता निर्माण को सक्षम बनाता है जबकि पुरानी संरचना में एनटीए के मानव संसाधनों को विशिष्ट परीक्षा-वार वर्टिकल में तैनात किया जाता था.”
इसमें कहा गया कि एनटीए के शीर्ष नेतृत्व की कमान अब भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी के पास है जो इसके महानिदेशक (डीजी) के रूप में काम कर रहे हैं. साथ ही, डीजी के पद को संयुक्त सचिव स्तर से अतिरिक्त सचिव स्तर तक अपग्रेड करने और पांच वरिष्ठ संयुक्त सचिव-स्तर के पद बनाने के प्रस्तावों पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है.
केंद्र ने कहा कि एनटीए के वरिष्ठ नेतृत्व में अब कई सेवाओं से अधिकारी शामिल हैं, जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएफ), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) और भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) आदि शामिल हैं.
हलफनामे में कहा गया कि टेक्नोलॉजी, मानव संसाधन, मूल्यांकन अनुसंधान और विकास, परीक्षा केंद्र, उम्मीदवार अनुभव, सूचना सुरक्षा, परीक्षा सुरक्षा और सतर्कता जैसे क्षेत्रों में ओपन मार्केट से भी डोमेन विशेषज्ञों की भर्ती की जा रही है.
इसमें कहा गया, “नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का पूरा नया संस्थागत ढांचा, जिसमें सरकारी कैडर और मजबूत जनादेश के लिए आवश्यक पेशेवर कैडर शामिल हैं, अभी सक्रिय रूप से विचाराधीन है और एचपीटीएफ से प्राप्त अंतिम सिफारिशों पर उचित विचार-विमर्श के बाद इसे लागू किया जाएगा.”
केंद्र सरकार ने Supreme Court को बताया कि पूर्व यूआईडीएआई चेयरमैन नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में 27 जुलाई को बनाई गई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (एचपीटीएफ) ने अपना काम शुरू कर दिया है. इसने एनटीए के डायरेक्टर जनरल और उच्च शिक्षा विभाग समेत कई स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की है.
हलफनामे में कहा गया है कि एचपीटीएफ ने एचएलसीई की सिफारिशों को लागू करने की देखरेख करने वाली हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन के. राधाकृष्णन से भी सलाह-मशविरा किया है.
इसमें आगे कहा गया है कि राधाकृष्णन की अगुवाई वाली एचएलसीई ने 101 सिफारिशें की थीं. इनमें नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में सुधार, लंबे समय के लिए संस्थागत सुधार, डिजिटल एजुकेशन टेस्टिंग और शिक्षा मंत्रालय द्वारा समय-समय पर निगरानी जैसे मुद्दे शामिल थे.
फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में केंद्र ने बताया कि नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित भारत सरकार प्रेस बिल्डिंग में एनटीए को 55,524.53 स्क्वायर फीट की खास ऑफिस जगह दी गई है.
इसमें कहा गया, “इस बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल और चौथी व छठी मंजिल के कुछ हिस्सों को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को दिया गया है, जिसमें कुल 55,524.53 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस है.”
हलफनामे के मुताबिक, पिछले महीने एनटीए के गोपनीय कामकाज को नई सरकारी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया गया था.
केंद्र ने कहा कि नई सुविधा से यह पक्का होगा कि एनटीए के कामकाज के अलग-अलग विभाग और टॉप लीडरशिप सुरक्षित सरकारी बिल्डिंग से काम करें, साथ ही इसके गोपनीय कामकाज वाले डिवीजन को एचएलसीई की सिफारिश के मुताबिक सुरक्षा के स्तर के साथ तैयार किया जा सके.
गोपनीय इलाके में सुरक्षा इंतजाम भी मजबूत किए गए हैं. मिंटो रोड वाली सुविधा में सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल और स्क्रीनिंग के लिए सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) के 39 जवानों को तैनात किया गया है.
हलफनामे में कहा गया है कि सुरक्षा उपायों में तलाशी लेना, सामान की एक्स-रे स्क्रीनिंग मशीनें और एंट्री व एग्जिट पॉइंट पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) लगाना शामिल है.
केंद्र ने Supreme Court को यह भी बताया कि परीक्षा प्रक्रिया के अहम चरणों के लिए एचएलसीई की सिफारिश के मुताबिक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तय किए गए हैं. इन चरणों में प्रश्न-पत्र तैयार करना, अनुवाद, छपाई, पैकिंग, ट्रैकिंग, आवाजाही, परीक्षा के दिन के नियम, ट्रंक खोलना, परीक्षा केंद्र की सुरक्षा और वापसी की आवाजाही व नतीजों की गणना शामिल हैं. हलफनामे में कहा गया है, “ऑपरेशनल सिक्योरिटी (कामकाज की सुरक्षा) की वजह से, पूरी और बारीक ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (एसओपी) को पब्लिक रिकॉर्ड में नहीं रखा जा रहा है.”
इसमें आगे कहा गया कि Supreme Court के सामने पहले ही जो उपाय रखे जा चुके हैं, उनमें शामिल हैं: क्यूआर-कोड ट्रैकिंग और प्रश्न पत्रों का आधार ऑथेंटिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल, परीक्षा-केंद्र की सुरक्षा, आधार-आधारित बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन, कई स्तरों पर तलाशी (मल्टी-लेयर फ्रिस्किंग), मोबाइल जैमर, सीसीटीवी मॉनिटरिंग, एआई टूल्स का इस्तेमाल और पांच-स्तरीय निगरानी ढांचा.
हलफनामे में कहा गया है कि एचपीटीएफ अभी दूसरे मुद्दों के साथ-साथ नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (सीबीटी) में बदलने की संभावना पर भी विचार कर रहा है.
इसमें कहा गया, “नीट (यूजी) को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग में बदलने की संभावना पर विचार किया जा रहा है. इसमें बदलाव का डिजाइन, क्रम, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण, महिला और कम कनेक्टिविटी वाले जिलों के उम्मीदवारों पर इसके असर जैसे पहलू शामिल हैं.”
केंद्र ने कहा कि टेस्ट-सेंटर की उपलब्धता में भौगोलिक अंतर को दूर करने और परीक्षा-स्तर के स्पेसिफिकेशन्स को स्टैंडर्डाइज करने के लिए एक राष्ट्रीय परीक्षा-स्तर का सीबीटी इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी भी तैयार की जा रही है.
इसमें आगे कहा गया कि सीबीटी में बदलाव के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन के साथ व्यवस्थित बातचीत और सहमति की जरूरत होगी.
केंद्र सरकार ने Supreme Court को बताया कि वह एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.
हलफनामे में कहा गया, “भारत सरकार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परीक्षाओं की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और उन्हें लगातार मजबूत करने के प्रति अपनी पक्की और जारी प्रतिबद्धता को सम्मानपूर्वक रिकॉर्ड पर रखती है.”
यह घटनाक्रम Supreme Court के उस बयान के कुछ दिनों बाद हुआ है जिसमें कोर्ट ने कहा था कि वह एनटीए ऑफिस का दौरा कर सकता है ताकि जमीनी स्तर पर यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा आयोजित करने का उसका सिस्टम, जिसमें मैनपावर और अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं, प्रभावी ढंग से काम कर रहा है या नहीं.
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने जोर दिया था कि संस्थागत सुधारों के लिए की गई सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए, न कि उन्हें सिर्फ रिपोर्ट तक ही सीमित रखा जाना चाहिए.
Supreme Court ने एचपीटीएफ के साथ तालमेल बिठाने वाले जॉइंट सेक्रेटरी को प्रस्तावित सुधारों को लागू करने में हुई प्रगति का ब्योरा देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया था और आदेश दिया था कि इस हलफनामे को छात्रों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए.
इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी.
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एससीएच/पीएम