
नई दिल्ली, 10 जुलाई . दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस के कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता को पहले ही चुकाई गई रकम को ध्यान में रखते हुए उनकी सजा और जुर्माने को कम कर दिया.
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजपाल यादव के वकील ने शुक्रवार को से बात करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने सात चेक बाउंस मामलों में एक्टर राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा और उनकी सजा को 6 माह से घटाकर 3 माह कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने उन पर कुल 7.35 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया और इस आदेश के खिलाफ Supreme Court जाने के लिए उन्हें दो महीने का समय दिया.
उन्होंने आगे कहा कि 5 करोड़ के चेक बाउंस मामले में हमने पहले ही 4.5 करोड़ रुपए दे दिए हैं. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला वर्ष 2012 का है. हम आगे Supreme Court में जरूर अपील करेंगे.
इससे पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने राजपाल यादव के आचरण को संदिग्ध बताया और आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए उन्हें तीन महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी. उन्हें इस आदेश को Supreme Court में चुनौती देने के लिए दो महीने का समय भी दिया गया है.
जेल की सजा के साथ-साथ अदालत ने हर मामले में 1.05 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इस तरह चेक बाउंस के सातों मामलों में कुल जुर्माना 7.35 करोड़ रुपए बनता है.
अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपए शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे जबकि 25 हजार रुपए राज्य को जमा कराए जाएंगे. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव यदि इस फैसले को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें Supreme Court जाने के लिए दो महीने का समय दिया जाता है.
यह पूरा मामला अभिनेता की फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ा है. साल 2010 में फिल्म के लिए राजपाल यादव ने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और तय समय पर कर्ज की रकम वापस नहीं की जा सकी. बाद में भुगतान के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए.
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने पहले राजपाल यादव और उनकी पत्नी को छह महीने की सजा सुनाई थी. बाद में सेशन कोर्ट ने भी फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा.
हाईकोर्ट ने पहले उनकी सजा पर अंतरिम रोक लगाई थी और समझौते के लिए समय देते हुए बकाया राशि चुकाने का अवसर भी दिया था. कई बार आश्वासन देने के बावजूद भुगतान पूरा नहीं किया गया. इस वजह से दिल्ली हाईकोर्ट ने अब उनकी सजा को बरकरार रखा है.
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डीके/एबीएम