छत्तीसगढ़ की अदालत ने बच्चे से दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई

रायपुर/दुर्ग, 11 सितंबर . छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत बनी एक विशेष अदालत ने अप्रैल 2025 में अपनी छह साल की भतीजी से दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक 24 साल के व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है.

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) के एडिशनल सेशन जज ने सोमेश यादव को पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) और 238(ए) के तहत दोषी ठहराया.

कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धारा 103(1) के तहत 5,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया और जुर्माना न भरने पर एक साल की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई.

बीएनएस की धारा 238(ए) के तहत, दोषी को पांच साल की कठोर कैद और 1,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई. जुर्माना नहीं भरने पर एक महीने की अतिरिक्त जेल होगी.

बीएनएस की धारा 238(ए) सबूत मिटाने या गलत जानकारी देने से संबंधित है. सजाएं एक साथ चलेंगी.

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मृत बच्ची के परिवार को राज्य सरकार की मुआवजा योजना के तहत 7 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए.

यह मामला अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था, जब दुर्ग के मोहन नगर पुलिस स्टेशन इलाके से छह साल की बच्ची के लापता होने की सूचना मिली थी. बाद में उसका शव उसके घर के पास खड़ी एक कार से बरामद किया गया.

मेडिकल जांच से पुष्टि हुई कि उसके साथ यौन उत्पीड़न हुआ था. पुलिस ने चार संदिग्धों का डीएनए टेस्ट कराया. सैंपल बच्ची के चाचा, सोमेश यादव से मेल खा गए. उसे गिरफ्तार कर लिया गया और पूछताछ के दौरान उसने अपराध कबूल कर लिया. उसके खिलाफ रेप और हत्या का मामला दर्ज किया गया और उसे कोर्ट में पेश किया गया.

ट्रायल के दौरान, अभियोजन पक्ष ने मेडिकल, फोरेंसिक और अन्य सबूतों के जरिए आरोप साबित किए. कोर्ट ने आरोपी को सभी आरोपों में दोषी पाया और माना कि अपराध के लिए कानून के तहत अधिकतम सजा जरूरी है. दोषी अभी न्यायिक हिरासत में है. उसके पास उपलब्ध आगे के कानूनी विकल्पों के लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.

एससीएच/एबीएम