जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव ने अनंतनाग स्थित उमा भगवती मंदिर में प्रतिष्ठान दिवस समारोह में लिया हिस्सा

श्रीनगर, 21 जुलाई . जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को अनंतनाग जिले के शांगुस स्थित उमानगरी में माता उमा भगवती मंदिर का दौरा किया. उन्होंने यहां मूर्ति प्रतिष्ठान दिवस समारोह में भाग लिया, जो उमा भगवती अस्थापन ट्रस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय यज्ञ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में मनाया जा रहा है.

मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए मुख्य सचिव ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और जम्मू-कश्मीर के लोगों की शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए माता का आशीर्वाद मांगा. उन्होंने ‘कलश पूजा’ और मूर्ति प्रतिष्ठान दिवस के अवसर पर आयोजित अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लिया.

इस अवसर पर अनंतनाग के उपायुक्त (डीसी) डॉ. बिलाल मोहिउद्दीन भट, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ट्रस्ट के सदस्य भी मौजूद रहे. मंदिर में चल रहे विरासत संरक्षण कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले ऐसे स्थलों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि मंदिर के लिए चल रही विकास परियोजना में अतिरिक्त कार्यों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और मंदिर की पवित्रता को समग्र रूप से सुरक्षित रखा जा सके.

इस अवसर पर उमा भगवती अस्थापन ट्रस्ट ने समारोह में शामिल होने और मंदिर के संरक्षण एवं विकास के लिए निरंतर सहयोग का आश्वासन देने पर मुख्य सचिव का आभार व्यक्त किया.

ट्रस्ट ने धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने में अनंतनाग के उपायुक्त की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की.

उमा भगवती मंदिर अनंतनाग का एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जिसकी विशेषता यहां मौजूद पांच प्राकृतिक जल स्रोत (झरने) हैं. यह मंदिर जुलाई 2024 में 34 वर्षों तक बंद रहने के बाद फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था.

यह मंदिर कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है.

कश्मीरी पंडित समुदाय घाटी में अपने पैतृक धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और संरक्षण का कार्य शांतिपूर्वक आगे बढ़ा रहा है. पुनर्वास की बजाय समुदाय फिलहाल मंदिरों और धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार पर ध्यान दे रहा है. प्रवासी कश्मीरी पंडितों के सहयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से यह पहल पुराने धार्मिक स्थलों को फिर से जीवंत बना रही है और समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है.

एएमटी/एबीएम