Supreme Court के अंतरिम आदेश पर सीजेपी ने जताई चिंता, कहा-सरकार युवाओं से किए वादे निभाए

नई दिल्ली, 28 जुलाई . कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने Supreme Court के अंतरिम आदेश को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर Supreme Court के आदेश से पूरे देश में चिंता पैदा होनी चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से आदेश के चौथे निर्देश का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें सरकारों को मौजूदा एफआईआर पर आगे बढ़ने और जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह निर्देश भारत सरकार की ओर से युवाओं को दिए गए उस भरोसे के विपरीत है, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने और किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि इसी भरोसे और बातचीत के आधार पर सीजेपी ने अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस लिया था.

सीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अब केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारें Supreme Court के इस अंतरिम आदेश का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को जारी रखने के लिए कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उनकी चिंता रही है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक उद्देश्य के लिए निशाना बनाया जा सकता है.

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार के वकीलों ने इस अंतरिम आदेश का विरोध क्यों नहीं किया, जबकि केंद्र सरकार और सीजेपी के बीच बातचीत का सिलसिला जारी था और प्रदर्शन खत्म करने को लेकर सहमति बनी थी. सौरव दास ने कहा कि इस पृष्ठभूमि की जानकारी के बिना आया आदेश उनके लिए स्वीकार्य नहीं है.

सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि हजारों छात्रों और युवाओं को दिए गए सार्वजनिक भरोसे को बाद की कानूनी प्रक्रिया के जरिए कमजोर नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों का संस्थानों पर विश्वास प्रभावित हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि Supreme Court के अंतरिम आदेश में ऐसा कुछ नहीं है जो केंद्र या राज्य सरकारों को एफआईआर वापस लेने या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने से रोकता हो.

उन्होंने बिहार और असम सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ राज्यों ने पहले ही ऐसे मामलों को वापस लेने की दिशा में कदम उठाए हैं. उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार और संबंधित भाजपा-एनडीए शासित राज्य सरकारें Supreme Court की कार्यवाही के दौरान प्रदर्शनकारियों से किए गए वादों को रिकॉर्ड पर रखें, ताकि मामले में पूरी पारदर्शिता बनी रहे.

सौरव दास ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और सरकारों को अपने सार्वजनिक वादों का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि एफआईआर वापस लेने और भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया जाए.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती है तो सीजेपी के पास छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों के समर्थन में देशव्यापी आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और वादों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है.

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