बेंगलुरु बोरिंग अस्पताल हादसे पर सख्त हुए सीएम, बारिश से पहले एहतियाती इंतजाम के निर्देश

बेंगलुरु, 30 अप्रैल . बेंगलुरु के बोरिंग अस्पताल में भारी बारिश के दौरान दीवार गिरने से सात लोगों की मौत के बाद कर्नाटक सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री की ओर से इस हादसे के बाद ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के आयुक्तों की बैठक बुलाई गई, जिसमें बारिश शुरू होने से पहले एहतियाती इंतजाम सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए.

मुख्यमंत्री की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बोरिंग अस्पताल में भारी बारिश के कारण कंपाउंड ढहने से सात लोगों की मौत के बाद गुरुवार को ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के आयुक्तों की बैठक आयोजित की गई. बैठक में मानसून से पहले सुरक्षा उपायों को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए.

बैठक में उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, विधायक रिजवान अरशद, मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश, जीबीए आयुक्त महेश्वर राव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अंजुम परवेज समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

इस बीच, कर्नाटक लोकायुक्त के न्यायमूर्ति बी.एस. पाटिल ने गुरुवार को हादसे वाली जगह का दौरा कर स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए. इस हादसे में एक बच्ची समेत सात लोगों की मौत हुई थी. उन्होंने चिकित्सा शिक्षा विभाग से भी घटना पर रिपोर्ट मांगी है.

गौरतलब है कि बुधवार को तेज बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान के बीच अस्पताल की कंपाउंड वॉल गिर गई थी, जिससे कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए.

मौके का निरीक्षण करने के बाद न्यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी बेंगलुरु की नागरिक एजेंसियों पर तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में स्वत: मामला दर्ज कर रहे हैं और यह जांच केवल इस घटना तक सीमित नहीं रहेगी.

उन्होंने कहा कि राज्य और बेंगलुरु शहर में इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए. इसके लिए सभी इलाकों और वार्डों में सार्वजनिक पहुंच वाले कमजोर ढांचों की पहचान कर समाधान निकाला जाना चाहिए. संबंधित अधिकारियों को बुलाकर जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि हर साल भारी बारिश होती है, इसलिए बेंगलुरु की नागरिक एजेंसी और अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे पहले से सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करते. शुरुआती तौर पर साफ है कि इस जिम्मेदारी में लापरवाही हुई है.

एएमटी/एबीएम