सीएम डॉ. प्रमोद सावंत ने दीप जलाकर किया ‘राजनीतिज्ञ सम्मेलन’ का शुभारंभ, कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल

आबूराज (सिरोही), 12 जुलाई . आबूराज स्थित ब्रह्माकुमारीज संस्थान के ज्ञान सरोवर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय राजनीतिज्ञों के राष्ट्रीय सम्मेलन का गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया. सम्मेलन के प्रथम सत्र का विषय “शांतिपूर्ण समाज के लिए राजनीति में आध्यात्मिकता” रखा गया. इसमें देशभर से राजनीति से जुड़े लगभग 400 जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं.

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुई. ब्रह्माकुमारीज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत का पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया. उद्घाटन समारोह में ब्रह्माकुमारीज के महासचिव बीके करुणा, बीके आशा, तेलंगाना सरकार की मंत्री सविता अनुसूया, प्रभाग अध्यक्ष बीके लक्ष्मी, राष्ट्रीय संयोजक बीके उषा, बीके सपना सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे.

सम्मेलन के प्रथम सत्र में राजनीति और आध्यात्मिक मूल्यों के समन्वय पर चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि समाज में शांति, सौहार्द और सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए राजनीति में नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का समावेश आवश्यक है. उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सेवा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया.

मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अपने संबोधन में कहा, “राजनेता बिना किसी लाभ के कहीं नहीं जाते, लेकिन यहां हम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए आए हैं.”

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का जनता के साथ सतत संवाद लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इसी से विकास की गति को मजबूती मिलती है. उनके अनुसार, राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी साधन है.

मुख्यमंत्री ने कहा, “जो प्रजा का सुख होता है, वही राजा का सुख होता है.” उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि का लक्ष्य जनता के कल्याण और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना होना चाहिए. उन्होंने ईमानदारी, सेवा-भाव और पारदर्शिता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि शासन व्यवस्था रामराज्य की भावना पर आधारित होनी चाहिए, जहां न्याय, सुशासन और जनकल्याण सर्वोपरि हों.

समाज में बढ़ती कटुता और विभाजन पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. सावंत ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज जैसी आध्यात्मिक संस्थाएं प्रेम, भाईचारे और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देकर सामाजिक समरसता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. सम्मेलन के आगामी सत्रों में नेतृत्व, नैतिक राजनीति, जनसेवा और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर देशभर से आए प्रतिनिधि विचार-विमर्श करेंगे.

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