
नई दिल्ली, 27 सितंबर . कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और कर्मवीर सिंह बौद्ध ने एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन किया. दोनों सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की.
से बातचीत में कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सीईसी ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के मुद्दे पर कहा कि सच्चाई देश की जनता के सामने आ चुकी है. राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और अब यह मामला सबके सामने आ गया है. चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आए हैं और उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए. यदि सीईसी स्वयं इस्तीफा नहीं देते हैं तो सरकार को उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए.
वहीं, कांग्रेस सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि राहुल गांधी की बात तथ्यों पर आधारित है. पूरी कांग्रेस पार्टी और विपक्ष सीईसी के इस्तीफे की मांग कर रहा है. सत्ता पक्ष के नेताओं से भी अपील करते हुए कहा कि अगर वे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान में विश्वास करते हैं और संविधान की वजह से ही मंत्री, विधायक और सांसद बने हैं, तो उन्हें संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए. यदि भविष्य में संविधान कमजोर हुआ तो इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद पर भी पड़ेगा. सभी लोगों को मिलकर ऐसे लोगों को बेनकाब करना चाहिए, जो संवैधानिक संस्थाओं का कथित तौर पर दुरुपयोग कर रहे हैं.
कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तुरंत अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग किया है. यदि देश इसी तरह चलता रहा तो यह फिर से गुलामी की ओर जा सकता है.
चुनाव आयोग की बैठक में तीनों चुनाव आयुक्तों के शामिल होने को लेकर कांग्रेस सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक आयोग स्वतंत्र संस्थाएं हैं. भारतीय संविधान ने इन संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार दिया है और वे किसी राजनीतिक दल या सरकार के अधीन काम नहीं करते. हालांकि इन संस्थाओं ने अपनी स्वतंत्रता और नियम कायदों को कमजोर कर दिया है.
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे अधिकारियों को संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए. दो चुनाव आयुक्तों ने समय-समय पर अपनी आवाज उठाई, लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और हरियाणा में एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम हटाए गए और नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए.
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डीकेएम/वीसी