
नई दिल्ली, 6 अगस्त . संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बरकरार है. कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए और गुरुवार को पूरे दिन सदन से वॉकआउट भी किया.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सदन के संचालन के लिए सरकार की गंभीरता जरूरी है. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि सदन तभी चलेगा, जब केंद्रीय गृह मंत्री आएंगे, तो क्या केंद्रीय गृह मंत्री 11 बजे नहीं आ सकते? क्या वे सदन के व्यवस्थित होने का इंतजार करेंगे? जिन मंत्रियों को जवाब देना होता है, वे 11 बजे तक आ जाते हैं. पांच या दस मिनट में हम मौजूद होते हैं. उन्हें देखकर हम सवाल पूछते हैं. इसलिए मेरी नजर में यह सही नहीं है.
उन्होंने सफाई दी कि सब कुछ ठीक होने पर वे आएंगे, लेकिन चीजों को आगे बढ़ाने के लिए पहले आना जरूरी है.
प्रमोद तिवारी ने चेयरमैन के निर्देश का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि चेयरमैन ने भी निर्देश दिया था कि गृह मंत्री को सदन में बुलाया जाए. इसके साथ ही उन्होंने मंदिर निर्माण और चंदे से जुड़े आरोपों पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा. तिवारी ने कहा, “जब मंदिर में चोरी का मुद्दा उठाया गया, तो प्रधानमंत्री खुद इसका जवाब दे सकते हैं. Supreme Court के फैसले के मुताबिक प्रधानमंत्री ने ही ट्रस्ट बनाया था और मंदिर के निर्माण में भी शामिल थे, फिर भी वे नहीं आ रहे हैं. वे इस इमारत में आते हैं, संसद आते हैं, लेकिन सदन में नहीं आते. इसी कारण आज मैंने यह सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को आकर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर जवाब देना चाहिए और वे नहीं आ रहे हैं, इसी कारण हमने पूरे दिन के लिए सदन से वॉकआउट किया.”
कांग्रेस सांसद केसी. वेणुगोपाल ने कहा, “हम चर्चा के पक्ष में हैं. हम पहले दिन से ही कह रहे हैं कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं. सरकार ही चर्चा रोक रही है. सरकार कोई चर्चा नहीं चाहती. चाहे चढ़ावा चोरी मामला हो या छात्रों पर अत्याचार, वे किसी भी चीज पर चर्चा नहीं करना चाहते. मंत्री खुद नहीं आ रहे हैं और फिर वे विपक्ष पर दोष मढ़ते हैं. आजकल लोग सब समझते हैं.”
वेणुगोपाल ने गुरुवार की कार्यवाही में उठाए गए एक अन्य मुद्दे का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि चर्चा सशस्त्र बलों के वेतन, पेंशन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों से जुड़ी थी. इसमें कई बार देरी हुई है और ऑडिट में कुछ गड़बड़ियां भी पाई गई हैं. पीएसी ने ऑडिट रिपोर्ट की बारीकी से जांच की और रक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है.
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रयागराज प्रशासन द्वारा छात्रों की गूंज कार्यक्रम की इजाजत रद्द करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी होती है और कोई भी विपक्षी पार्टी किसी भी वर्ग की आवाज उठा सकती है. राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी देश में छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. लेकिन, जिस तरह से प्रयागराज प्रशासन ने इजाजत रद्द की, यह यूपी सरकार का अलोकतांत्रिक चेहरा दिखाता है. हम हर हाल में इसकी निंदा करते हैं. कार्यक्रम होंगे और हम छात्रों के लिए आवाज उठाएंगे.”
झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर राहुल गांधी के चुप रहने के भाजपा के आरोपों पर हुड्डा ने कहा, “वे जहां चाहें, वहां जाएंगे.”
कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने भी सरकार पर तानाशाही वाली सोच का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “राहुल गांधी लगातार आम लोगों, किसानों, मजदूरों और छात्रों की आवाज उठाते रहे हैं और उनकी जायज मांगों के लिए लड़ते रहे हैं. सरकार को लगता है कि देश की समस्याएं जनता के सामने नहीं आनी चाहिए. यह तानाशाही वाली सोच को दिखाता है. लोकतंत्र में मुद्दों को उठाने की इजाजत होनी चाहिए.”
तमिलनाडु से जुड़े एक सांस्कृतिक मुद्दे पर भी कांग्रेस ने राज्यपाल को पत्र लिखा है. कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, “हमने तमिलनाडु के राज्यपाल को पत्र लिखकर उनसे राज्य में स्थापित परंपरा का पालन करने का अनुरोध किया है, जिसके तहत सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत तमिल थाई वाज्तु से होती है. हमें पता चला था कि राजभवन से इस क्रम को बदलने का निर्देश दिया गया था. हम चाहते हैं कि पारंपरिक क्रम बना रहे, जिसमें शुरुआत तमिल थाई वाज्तु से हो, उसके बाद वंदे मातरम हो और समापन राष्ट्रगान के साथ हो.”
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एससीएच/एबीएम