कांग्रेस इस देश में अप्रासंगिक, जनता ने विपक्षियों को सिर उठाने लायक नहीं छोड़ाः संजय सरावगी

पटना, 27 सितंबर . बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक बार फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और विपक्षी दलों पर निशाना साधा है. उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए विज्ञप्ति को सही बताते हुए विपक्ष से भ्रम न फैलाने की अपील की है.

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने 30 सितंबर को होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक पर कहा, “कांग्रेस और विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की राजनीति करते हैं. संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाने का काम करते हैं. जहां यह जीतते हैं, वहां सब कुछ ठीक है और जहां हारते हैं, तो एसआईआर का बहाना या अन्य कोई बहानेबाजी करके संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाते हैं. स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग का प्रेस नोट आया, जिसमें कहा गया है कि सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए हैं. कांग्रेस इस देश में अप्रासंगिक हो गई है और राजद का सूपड़ा साफ हो गया है. सभी विपक्षियों का हाल देश की जनता ने ऐसा किया है कि वह सिर उठाने लायक नहीं बचे हैं.”

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेता है. राहुल गांधी देश के लिए मजाक के पात्र हो गए हैं. चुनाव आयोग के फैसले तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से होते हैं. पश्चिम बंगाल में जिन 10 विधानसभा क्षेत्रों से सबसे अधिक मतदाताओं के नाम एसआईआर में कटे, वहां की 6 सीटों पर टीएमसी और कांग्रेस के उम्मीदवार जीते. इसलिए विपक्ष और राहुल गांधी को भ्रम फैलाना बंद करना चाहिए.”

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) समुदायों से संबंधित सांसदों को बोलने का पर्याप्त समय देने की मांग की है. इस पर संजय सरावगी ने कहा, “लोकसभा का मामला है और सभी को बोलने का अधिकार है. जो नियमावली है और नियम है, उसके अंतर्गत लोकसभा अध्यक्ष व्यवस्था तय करेंगे.”

गैराज मालिक की गोली मारकर हत्या किए जाने पर संजय सरावगी ने कहा, “पुलिस को खुली छूट दी गई है, अपराधी किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे. सीएम सम्राट चौधरी ने गंभीर अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं.”

डीजीपी विनय कुमार द्वारा वोलेंट्री रिटायरमेंट लिए जाने पर संजय सरावगी ने कहा, “यह उनका स्व-निर्णय है. खुद निर्णय किए हैं. इसको इसी रूप में देखा जाए कि डीजीपी हमारे एक अच्छे अधिकारी रहे हैं लेकिन उन्होंने खुद ही वीआरएस लेने का निर्णय किया है. यह निर्णय उनका निजी निर्णय है. इसका सम्मान होना चाहिए.”

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