
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर . कांग्रेस ने शुक्रवार को दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की घोषणा का स्वागत किया. पार्टी के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यह जामिया के आंदोलनरत छात्रों के साहस और संकल्प की जीत है. साथ ही, कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रशासन ने इस आंदोलन को कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.
सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “यह जामिया में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के दृढ़ संकल्प और साहस की जीत है. मैं जामिया के सभी छात्रों को बधाई देता हूं. प्रशासन ने इस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. जिस तरह से छात्र आंदोलन कर रहे थे और भूख हड़ताल पर थे और छात्राओं की ओर से दिखाया गया समर्थन अपने आप में ऐतिहासिक था.”
उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं छात्रों को समर्थन देने पहुंचा था, लेकिन जो आरोप लगाकर जामिया प्रशासन और रजिस्ट्रार ने एफआईआर कराई, वो बचकाना व्यवहार था. मैं बस पैदल ही कैंपस के अंदर चला गया, जबकि शायद उन्हें उम्मीद थी कि मैं अपनी कार से आऊंगा. वहां गाड़ियां तो आईं, लेकिन उसके पहले मैं ऑटोरिक्शा में बैठकर एक साधारण कपड़े पहनकर अंदर चला गया. 4 नंबर गेट खुला हुआ था और मैं टहलते हुए ही घुस गया और बच्चों से मुलाकात की. उन्हें अपना समर्थन भी दिया. इसके बाद मैं वहां से वापस लौट आया.”
प्रतापगढ़ी ने अपने खिलाफ दर्ज एक एफआईआर में लगाए गए आरोपों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना की. उन्होंने कहा, “प्रशासन उस समय मुझे गिरफ्तार भी नहीं कर पाया था. दो-तीन दिन पता चला कि मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है, तो यह हास्यास्पद था. इससे हम कोर्ट और जांच में निपटेंगे.”
कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी परिसर में विवादित नारे छात्रों ने नहीं लिखे थे, बल्कि जामिया प्रशासन ने दूसरों के साथ मिलकर एक साजिश के तहत इन्हें वहां लगाया था, ताकि विरोध प्रदर्शन को बदनाम किया जा सके. इन तमाम कोशिशों के बावजूद, प्रशासन को हार माननी पड़ी और झुकना पड़ा और यह सब छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की वजह से ही संभव हो सका.
उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी एक सत्याग्रह शुरू किया है. उसका असर छात्रों पर होगी और मुझे खुश है कि एनएसयूआई के तमाम बच्चे, जो भूख हड़ताल पर बैठे थे, उन्हें मैं बधाई देता हूं.
कांग्रेस नेता उदित राज ने भी इस घोषणा का श्रेय छात्रों को दिया, खासकर ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (एनएसयूआई) से जुड़े छात्रों को.
राज ने कहा, “यह एनएसयूआई के छात्रों के साहस और संघर्ष का नतीजा है. प्रशासन को बेवजह रुकावटें नहीं खड़ी करनी चाहिए थीं. बहरहाल, अब उसे चुनाव कराने की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. मैं एक बार फिर छात्रों को उनके संघर्ष के लिए बधाई देता हूं.”
वहीं, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने छात्रों के लगातार प्रयासों की तारीफ की और इस फैसले को पूरे देश में छात्र लोकतंत्र के लिए एक अहम पल बताया. उन्होंने कहा, “मैं जामिया के छात्रों को सलाम करता हू. जरा सोचिए, राजधानी में स्थित एक प्रमुख विश्वविद्यालय की क्या हालत रही होगी. पिछले दो दशकों से उन्हें एक यूनियन बनाने के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रखा गया था. मुझे लगता है कि यह पूरे देश के छात्र समुदाय के लिए जश्न मनाने का मौका है.”
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डीसीएच/