
मुंबई, 28 जून . हाल के दिनों में कॉमेडी के नाम पर परोसे जा रहे आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है. इसी मुद्दे पर मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखना बिल्कुल मुश्किल नहीं है. अगर किसी भी कंटेंट को सम्मान और सच्ची नीयत के साथ पेश किया जाए, तो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचने की संभावना बहुत कम रहती है.
से खास बातचीत में अनूप जलोटा से पूछा गया कि हाल के समय में कॉमेडी और मनोरंजन के कंटेंट को लेकर लगातार विवाद हो रहे हैं. ऐसे में रचनात्मक आजादी और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है?
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “संतुलन बनाए रखना बिल्कुल कठिन नहीं है. हमें हमेशा अपने कंटेंट को ईमानदारी और सम्मान के साथ पेश करना चाहिए. जब आपकी नीयत साफ होती है, तो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचने का खतरा बहुत कम हो जाता है.”
दरअसल, हाल ही में कमीडियन प्रणित मोरे के शो में पेश किए गए ‘370 रुपए वाली बिरयानी’ के रीमेक को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई थी. इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर कॉमेडी के नाम पर किस तरह का कंटेंट परोसा जाना चाहिए और उसकी सीमाएं क्या होनी चाहिए.
इस विवाद पर कमीडियन और अभिनेता सुनील पाल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जो लोग अश्लील कंटेंट के जरिए अपना घर चला रहे हैं, वे ‘समाज के आतंकवादी’ हैं.
से बातचीत में सुनील पाल ने कहा, “ये लड़के-लड़कियां कॉमेडी के नाम पर जिस तरह की अश्लीलता करते हैं, उससे भले ही उनका घर चल रहा हो, लेकिन वह देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रही है. इसलिए मैं ऐसे लोगों को समाज का आतंकवादी कहता हूं. मेरा मानना है कि जो समाज को समझ नहीं आता, वह समाज का हिस्सा नहीं होना चाहिए.”
उन्होंने यह भी मांग की कि जिन जगहों पर कॉमेडी शो आयोजित किए जाते हैं, वहां सख्त नियम बनाए जाएं. उनके मुताबिक आयोजकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मंच पर न गाली-गलौज हो, न अश्लील कंटेंट परोसा जाए और केवल साफ-सुथरी कॉमेडी ही दर्शकों तक पहुंचे. तभी इस तरह के विवादों पर कुछ हद तक रोक लगाई जा सकेगी, क्योंकि आज समाज, साफ-सुथरी कॉमेडी करने वाले कलाकार और उनके दर्शक सभी इस माहौल से चिंतित और डरे हुए हैं.
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वीकेयू/एएस