बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई में विलय पर विवाद, संस्थापक शांतनु देय बोले- पार्टी के सदस्य खुश नहीं

बारासत, 15 जून . बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई (नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी इंडिया) में संभावित विलय को लेकर पार्टी के संस्थापक शांतनु देय ने कहा कि इस फैसले पर उनसे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से कोई चर्चा नहीं की गई. शांतनु देय के अनुसार, पार्टी के अधिकांश सदस्य इस घटनाक्रम से खुश नहीं हैं और किसी भी निर्णय से पहले सामूहिक बैठक आवश्यक है.

शांतनु देय ने कहा, “2022 में मेरे कुछ दोस्तों और कुछ अन्य नेताओं के साथ मिलकर हमने एक नए राजनीतिक दल की स्थापना का निर्णय लिया था. हमारा उद्देश्य लोगों के अधिकारों के लिए काम करना और देशभर में उनकी आवाज उठाना था. इसी सोच के साथ हमने बैठकें कीं और संगठन की रूपरेखा तैयार की. मैंने त्रिपुरा से संगठन का काम शुरू किया. वहां लोगों को जोड़ने का अभियान चलाया गया और धीरे-धीरे संगठन का विस्तार होने लगा. इसके बाद 2023 में पार्टी का आधिकारिक पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) हुआ.”

उन्होंने कहा, “जहां तक बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने की खबर का सवाल है, इसकी जानकारी मुझे सोशल मीडिया और पार्टी के अन्य नेताओं के माध्यम से मिली. पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, उसमें कई सदस्य और पदाधिकारी होते हैं. मुझे पार्टी के नेताओं ने फोन करके इस विषय की जानकारी दी.

शांतनु देय ने कहा, “मैं पार्टी का संस्थापक हूं. मैंने त्रिपुरा में संगठन खड़ा किया, पार्टी का चुनाव चिह्न चुना, पार्टी का झंडा डिजाइन किया, संविधान लिखा और संगठनात्मक ढांचा तैयार किया. लेकिन जिस व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया, उन्होंने मुझसे, पार्टी के अन्य नेताओं, लीगल सेल और प्रवक्ताओं से कोई चर्चा किए बिना यह फैसला लिया.

उन्होंने कहा, “मैंने समाचारों में देखा कि वे लोग ओम बिरला जी से मिले थे. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वहां यह कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती है, तो आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है.”

उन्होंने बताया कि फिलहाल पार्टी के अधिकांश सदस्य यह मानते हैं कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले सभी को एक साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए. पार्टी के नए लोगों के साथ संभावित जुड़ाव को लेकर भी सामूहिक विचार-विमर्श जरूरी है. अभी तक कोई अंतिम या आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है. उनका कहना है कि पार्टी के कई सदस्य इस घटनाक्रम से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उनसे कोई राय नहीं ली गई. यदि टीएमसी के नेता हमसे बातचीत करना चाहते हैं, तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं. लेकिन कोई भी निर्णय पार्टी के संविधान और सामूहिक सहमति के अनुसार ही लिया जाएगा. जब पार्टी के सभी सदस्य और पदाधिकारी मिलकर निर्णय लेंगे, तब उसे सार्वजनिक रूप से भी साझा किया जाएगा.

शांतनु देय ने कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि उसके सभी सदस्यों और जनता की होती है. इसलिए सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही आगे का रास्ता तय किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सात उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से तीन उम्मीदवारों का नामांकन स्वीकार हुआ और उन्होंने चुनाव भी लड़ा. बाकी चार उम्मीदवार विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों के कारण चुनावी प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ सके.

उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही एनडीए का समर्थन करता हूं. हम चाहते हैं कि जहां भाजपा नहीं पहुंच पा रही हैं, वहां हम पहुंचे और लोगों के लिए काम करें. हम पहले भी सामाजिक और जनहित के कार्यों से जुड़े रहे हैं. हमारा उद्देश्य लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचना है.” शांतनु देय ने बताया कि अगर पीएम मोदी या सीएम सुवेंदु अधिकारी द्वारा बुलाया जाएगा तो हम जरूर जाएंगे.

पीआईएम/पीएम