गीता रानी: कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली एथलीट के करियर पर विवाद ने लगाया ब्रेक

नई दिल्ली, 15 सितंबर . भारतीय एथलेटिक्स की दुनिया में गीता रानी का नाम बेहद जाना-पहचाना है. गीता देश की एक सफल वेटलिफ्टर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने भारतीय वेटलिफ्टिंग को एक नई पहचान दिलाई है.

गीता रानी का जन्म 16 सितंबर 1981 को संगरूर, पंजाब में हुआ था. उनके मन में वेटलिफ्टिंग के प्रति गहरी रुचि बहुत कम उम्र से थी. यही वजह रही उन्होंने खेल की इस विधा में कुछ बड़ा करने का फैसला किया था. गीता ने महज 13 वर्ष की उम्र में सुरिंदर सिंह से कोचिंग लेनी शुरू की.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीता ने अपनी क्षमता और ताकत का एहसास पहली बार 2003 में एफ्रो-एशियन गेम्स में कराया था. हैदराबाद में आयोजित इस खेल में उन्होंने कांस्य पदक जीता था. इसके बाद उन्होंने 2004 में एशियन चैंपियनशिप में तीन रजत पदक अपने नाम किए.

गीता ने मेलबर्न में 2006 में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में 75+ भारवर्ग में हिस्सा लिया था और स्वर्ण पदक जीता था. खेल के इतने बड़े मंच पर गीता की स्वर्णिम सफलता ने उन्हें देश-विदेश में बड़ी लोकप्रियता दिलाई. दिल्ली में 2010 में आयोजित कॉमनमवेल्थ गेम्स में गीता पदक जीतने से चूक गई थीं और चौथे स्थान पर रही थीं.

भारत की इस दिग्गज वेटलिफ्टर का करियर विवादों से भी प्रभावित रहा है. वर्ष 2015 में राष्ट्रीय खेलों के दौरान वह एक प्रतिबंधित पदार्थ के लिए डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाई गई थीं. इसके बाद उन पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया था. हालांकि, 2017 में उन्हें प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया गया, लेकिन उसके बाद से वह कभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नजर नहीं आई हैं. दिग्गज वेटलिफ्टर ने फिलहाल आधिकारिक रूप से खेल को अलविदा नहीं कहा है.

वेटलिफ्टिंग में शानदार योगदान के लिए भारत सरकार ने 2006 में गीता रानी को ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया था.

पीएके