अदालत का फैसला, नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ दायर रिवीजन याचिका खारिज

भुवनेश्वर, 2 सितंबर . खुर्दा, भुवनेश्वर की सेशंस कोर्ट ने बुधवार को ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक और उनके करीबी सहयोगी व पूर्व नौकरशाह वीके पांडियन के खिलाफ दायर एक क्रिमिनल रिविजन याचिका खारिज कर दी.

यह याचिका सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग या गलत इस्तेमाल को लेकर दायर की गई थी.

भुवनेश्वर के वकील और समाजसेवी सुधीर चरण मोहंती ने एसडीजेएम, भुवनेश्वर के 25 मार्च, 2026 के उस आदेश को चुनौती देते हुए एक रिविजन याचिका दायर की थी, जिसमें पटनायक और पांडियन के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी.

शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने 14 अगस्त, 2024 को भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी. मोहंती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि पांडियन और पटनायक दोनों ने ओडिशा के सभी जिलों का दौरा किया और सरकारी खजाने से बिना किसी मंजूरी या भुगतान के कई हेलीकॉप्टर यात्राएं कीं.

आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इन यात्राओं का खर्च माइनिंग मालिकों, जमीन माफियाओं, रियल एस्टेट ऑपरेटरों, गैर-ओडिया ठेकेदारों और बेहिसाब पैसे के अन्य स्रोतों ने उठाया था. याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि कैपिटल पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज ने 19 अगस्त, 2024 तक एफआईआर दर्ज नहीं की थी.

इसके बाद, उन्होंने कथित तौर पर भुवनेश्वर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) के सामने लिखित एफआईआर सौंपी और उनके कार्यालय में इसे स्वीकार भी किया गया. मोहंती ने आगे तर्क दिया कि भुवनेश्वर के डीसीपी कार्यालय में एफआईआर मिलने के बावजूद, पांडियन और पटनायक के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई.

इसके बाद, मोहंती ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत 1 सीसी मामला दायर किया, जिसे बाद में एसडीजेएम कोर्ट, भुवनेश्वर ने खारिज कर दिया. अपनी शिकायत खारिज होने के बाद, उन्होंने एसडीजेएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत का रुख किया.

इस बीच, भुवनेश्वर में खुर्दा के सेशंस कोर्ट के जज को एसडीजेएम कोर्ट द्वारा 25 मार्च, 2026 को पारित आदेश में कोई गैर-कानूनी बात नहीं मिली.

खुर्दा के सेशंस जज बिरंची नारायण मोहंती ने कहा, “इस प्रकार, ऊपर की गई चर्चा को देखते हुए, यह अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि शिकायतकर्ता/याचिकाकर्ता ने न तो शिकायत याचिका में बताई गई किसी भी दंडात्मक धारा के तहत कोई मामला साबित करने के लिए सबूत पेश किए, न ही शिकायत पेश करने से पहले बीएनएसएस, 2023 की धारा 173(4) का अनिवार्य पालन किया, और न ही उनके पास बीएनएसएस, 2023 की धारा 33 के तहत शिकायत पेश करने का कोई कानूनी अधिकार था.”

एससीएच/डीकेपी