प्रियदर्शिनी फ्री बस यात्रा योजना पर महिलाओं को लेकर टिप्पणी करने वाले सीपी जॉन अपने बयान पर कायम

तिरुवनंतपुरम, 4 अगस्त . प्रियदर्शिनी फ्री बस यात्रा योजना को लेकर दिए गए अपने बयान पर केरल के परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन कायम हैं. उन्होंने अपनी टिप्पणियों का बचाव किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि वह कई महिलाओं की गरीबी को दिखा रहे थे, न कि इस कल्याणकारी कदम पर सवाल उठा रहे थे.

जॉन ने कहा, “कुछ महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पास घूमने-फिरने के लिए भी पैसे नहीं हैं. दुख की बात यह है कि राजनीतिक नेतृत्व, जिसमें मैं भी शामिल हूं, उनकी गरीबी को समझने में नाकाम रही. मैं यही बात कह रहा था.” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया.

परिवहन मंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि केरल के लोग सिर्फ गरीब होने का नाटक कर रहे हैं और जो लोग उनकी बुराई कर रहे हैं, उन्हें इस विवाद को हवा देने से पहले सफाई मांगनी चाहिए थी.

बता दें कि यह विवाद उस वक्त खड़ा हुआ जब सी.पी. जॉन ने केरल बस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की स्टेट कॉन्फ्रेंस में कहा कि महिलाएं घाटे में चल रही केएसआरटीसी बसों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की कर रही हैं क्योंकि प्रियदर्शिनी स्कीम के तहत सफर फ्री हो गया है.

उन्होंने कहा कि कई परिवार फ्री पब्लिक ट्रांसपोर्ट का फायदा उठाते हुए प्राइवेट स्कूलिंग पर भारी खर्च करते रहे और प्राइवेट हेल्थकेयर के बजाय सरकारी अस्पतालों को प्राथमिकता देते रहे. उनकी इसी बात की विपक्षी पार्टियों और सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की जा रही है. विपक्ष ने मंत्री पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने और आम परिवारों के पसंद के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करने का आरोप लगाया.

हालांकि, समर्थकों का कहना था कि वह केरल के शानदार सोशल इंडिकेटर्स के बावजूद अभी भी मौजूद आर्थिक तंगी की ओर ध्यान खींच रहे थे.

सी.पी. जॉन अपने छात्र दिनों में एसएफआई नेता और सीपीआई(एम) का एक जाना-माना चेहरा थे. 1986 में, विचारधारा से अलग होने के बाद, वह अपने पॉलिटिकल मेंटर एम.वी. राघवन के साथ पार्टी से बाहर हो गए.

जब राघवन ने कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी (सीएमपी) बनाई और उसे कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ जोड़ा, तो जॉन उसके सबसे करीबी राजनीतिक साथी बने रहे और पार्टी के मुख्य ऑर्गनाइजर में से एक बनकर उभरे.

सी.पी. जॉन तब से यूडीएफ का एक अहम हिस्सा बने रहे, केरल के बदलते राजनीतिक माहौल में भी अपनी पहचान बनाए रखी और खुलकर बोलते हैं.

एसडी/पीएम