
तिरुवनंतपुरम, 27 मई . केरल में पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पिनाराई विजयन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को लेकर राजनीतिक बवाल बढ़ गया है. सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने बुधवार को विजयन के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. पार्टी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है.
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने ईडी की इस छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार या गृह मंत्रालय को इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना नहीं थी. उन्होंने कहा, “केरल सरकार या गृह मंत्रालय को इस छापेमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने हमसे किसी तरह का सहयोग भी नहीं मांगा. इसलिए हमें छापेमारी के विवरण के बारे में कुछ नहीं पता. यह सवाल ईडी से ही पूछा जाना चाहिए.”
चेन्निथला ने सीपीआई(एम) के आरोपों का भी जवाब दिया. पार्टी ने दावा किया था कि पूर्व सीएम पिनाराई विजयन के आवास पर ईडी की छापेमारी का संबंध मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात से है. इस पर चेन्निथला ने कहा, “केरल में हर कोई जानता है कि भाजपा और सीपीएम के बीच एक आपसी समझ थी. तो फिर उस समझ का क्या हुआ? उन्हें केरल की जनता को यह बताना होगा. हमारा भाजपा से कोई संबंध नहीं है. हम भाजपा से लड़ रहे हैं. हमने भाजपा और सीपीएम दोनों से लड़ाई लड़ी और सत्ता में आए.”
रमेश चेन्निथला ने श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से कीमती सामान गायब होने के मामले पर कहा, “यह बात छह महीने पहले की है. किसी भक्त ने कुछ सोना दान किया था, जो वहां से गायब हो गया. जब हमें जानकारी मिली, तो पुलिस ने जांच की और डीजीपी को रिपोर्ट सौंपी. मुझे बताया गया कि इसे पद्मनाभस्वामी मंदिर में एक जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति को सौंप दिया गया है.”
वहीं, सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने पिनाराई विजयन के आवास के बाहर मीडिया से बात करते हुए ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना बताया. उन्होंने कहा, “मैं पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास के सामने खड़ा हूं, जो अब विपक्ष के नेता हैं. यह कोई हैरानी की बात नहीं है. यह राजनीतिक बदले की भावना का मामला लगता है. कॉमरेड पिनाराई विजयन को केंद्रीय एजेंसियों की बार-बार जांच का सामना करना पड़ा है. आपातकाल के दौरान भी उनके साथ कठोर व्यवहार किया गया था. पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए. केरल की जनता इस कथित राजनीतिक खेल को समझने में सक्षम है.”
जॉन ब्रिटास ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “दोषसिद्धि का मामला क्या होता है? सिर्फ उन्हीं मामलों को सुर्खियों में लाया जाता है जो अदालत तक पहुंचते हैं. अगर 1,000 मामले हैं, तो उनमें से शायद सिर्फ 100 ही अदालत तक आगे बढ़ पाते हैं जबकि बाकी 900 मामले अधर में लटके रहते हैं. इससे तथ्यों में हेरफेर हो जाता है. यह मीडिया के कुछ हिस्सों को गुमराह कर सकती है, लेकिन हर किसी को नहीं.”
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एससीएच/पीएम