राजौरी में बाढ़ से फसल तबाह, कृषि विभाग ने शुरू किया सर्वे; किसानों को मिलेगा मुआवजा

राजौरी, 31 जुलाई . जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और लगातार बारिश के बाद कृषि विभाग ने पूरे जिले में फसल नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है. इसका मकसद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और अन्य सरकारी राहत उपायों के तहत किसानों को समय पर मुआवजा दिलाना है.

मुख्य कृषि अधिकारी राजेश वर्मा ने टीम के साथ बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित ‘अथी’ गांव का दौरा किया. यहां उफनती नदियों और नालों ने सैकड़ों कनाल उपजाऊ जमीन बहा दी. धान और मक्के की खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं. कई जगहों पर मिट्टी कटाव के कारण खेत खेती के लायक नहीं बचे हैं, जिससे किसान परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.

निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों से सीधे बात की और नुकसान का ब्यौरा दर्ज किया. किसानों ने बताया कि एक रात में उनकी साल भर की मेहनत पानी में बह गई. उन्होंने तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें. विभाग ने भरोसा दिलाया कि सर्वे में किसी भी प्रभावित किसान को छोड़ा नहीं जाएगा. नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन और केंद्र सरकार को भेजी जाएगी ताकि राहत प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके.

सीएओ राजेश वर्मा ने से बात करते हुए कहा, “यह इलाका राजौरी से सटा हुआ है और पानी के तेज बहाव के कारण यहां काफी नुकसान हुआ है. जैसा कि आप जानते हैं, इस महीने की 19 तारीख को यहां अचानक बाढ़ आई थी. नदी के किनारे की वह सारी खेती वाली जमीन, जहां धान और मक्के की फसलें उगाई गई थीं, या तो बह गई है या मलबे से ढक गई है. खड़ी फसलें जमा हुई गाद और कीचड़ के नीचे दब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है.”

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की टीमें राजौरी के सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच गई हैं. सर्वे पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है. पीएमएफबीवाई के तहत बीमाकृत किसानों के मुआवजे के दावों पर योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. जिन किसानों का बीमा नहीं है, उनका विवरण भी इकट्ठा करके सरकार को भेजा जाएगा ताकि अन्य उपलब्ध राहत प्रावधानों के तहत उन्हें वित्तीय सहायता देने पर विचार किया जा सके.

स्थानीय किसानों ने जिला प्रशासन की तत्परता की सराहना की. एक किसान ने कहा, “हमें भारी नुकसान हुआ है… सब कुछ बर्बाद हो गया है, और हमारी खेती की जमीन भी बह गई है. इसके बाद, कृषि विभाग के अधिकारी आए और हमें भरोसा दिलाया कि वे हमें किसी तरह का मुआवजा या मदद दिलाने में जरूर मदद करेंगे.”

किसानों ने डिप्टी कमिश्नर अभिषेक शर्मा का भी आभार जताया कि उन्होंने तुरंत विभागीय टीमों को प्रभावित गांवों में भेजा. उनका कहना है कि अब केंद्र सरकार और जिला प्रशासन से उम्मीद है कि समय पर मुआवजा, पुनर्वास सहायता और लगातार मदद मिलेगी, ताकि क्षतिग्रस्त कृषि भूमि को ठीक किया जा सके और वे फिर से खेती कर सकें.

एससीएच/पीएम