
नई दिल्ली, 3 सितंबर . किरण मोरे भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं. मोरे विकेट के पीछे अपनी चुस्त और फुर्तीली विकेटकीपिंग के लिए जाने जाते थे. लेकिन, दो घटनाओं ने किरण मोरे को एक क्रिकेटर से ज्यादा चर्चा दिलाई है.
किरण मोरे का जन्म 4 सितंबर 1962 को बड़ौदा में हुआ था. उन्होंने 1980-81 के सेशन में बडौदा के लिए प्रथम श्रेणी में डेब्यू किया था. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद किरण मोरे ने दिसंबर 1984 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया. साल 1986 में उन्हें टेस्ट टीम में भी मौका मिल गया. मोरे ने अपनी पहली ही टेस्ट सीरीज में 16 कैच लपकते हुए इतिहास रच दिया.
मोरे सिर्फ अपनी विकेटकीपिंग के लिए नहीं, बल्कि विकेट के पीछे से विपक्षी टीम के बल्लेबाजों पर तंज करते हुए उन्हें परेशान करने के लिए भी काफी मशहूर रहे.
1992 में विश्व कप में 4 मार्च को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला खेला गया था. इस मैच में मोरे ने विकेट के पीछे से इतनी अपील की थी कि पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद झल्ला गए और पिच पर ही कूदना शुरू कर दिया था. यह घटना क्रिकेट इतिहास की सर्वाधिक चर्चित घटनाओं में से एक है. सोशल मीडिया पर इस घटना की वीडियो वायरल होती रहती है.
एक बल्लेबाज के रूप में मोरे उतने प्रभावशाली नहीं थे, लेकिन निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने टीम के लिए कई अहम पारियां खेलीं. मोरे ने 49 टेस्ट की 64 पारियों में 25.70 की औसत के साथ 1,285 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 7 अर्धशतक निकले. विकेटकीपर के तौर पर मोरे ने 110 कैच लपकने के साथ 20 स्टंपिंग भी की. वहीं, 94 वनडे मैचों की 65 पारियों में उनके बल्ले से 563 रन निकले. वनडे में उनके नाम 63 कैच और 27 स्टंप दर्ज हैं.
1993 में ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से सम्मानित किरण मोरे ने इसी साल संन्यास के बाद कोच और कमेंटेटर के रूप में भी कार्य किया. 2002 से 2006 तक वह बीसीसीआई चयन समिति के अध्यक्ष रहे. मुख्य चयनकर्ता रहते हुए मोरे ने युवा क्रिकेटरों को भारतीय टीम में मौका दिया, जबकि सीनियर क्रिकेटरों को ड्रॉप किया. मोरे, सौरव गांगुली को टीम से ड्रॉप करने की वजह से भी चर्चा में रहे. गांगुली तब भारतीय क्रिकेट के सर्वाधिक सफल बल्लेबाज और कप्तान थे. उन्हें ड्रॉप करना आसान नहीं था, लेकिन मोरे ने ऐसा किया और सुर्खियां बटोरीं. टीम से ड्रॉप होने के बाद गांगुली मोरे के चयन समिति के अध्यक्ष रहते टीम इंडिया में वापसी नहीं कर सके थे.
मियांदाद और गांगुली के साथ हुई घटनाओं की वजह से मोरे आए दिन चर्चा में बने रहते हैं. वह आज भी घरेलू क्रिकेट में अलग-अलग संस्थाओं के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़े हैं.
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पीएके