दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

नई दिल्ली, 7 अगस्त . दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है, जिस पर अधिकारियों से संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप है. आरोपी बार-बार वरिष्ठ संवैधानिक और सरकारी अधिकारियों (सिविल सर्वेंट और पटना हाई कोर्ट के जज भी शामिल) के रूप में खुद को पेश करता था और गोपनीय जानकारी हासिल करता था. कोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तार न कर पाने के लिए दिल्ली पुलिस से सवाल भी किया.

जस्टिस गिरीश कथपालिया की सिंगल-जज बेंच ने मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए इस बात पर हैरानी जताई कि Supreme Court समेत कई बार जमानत याचिकाएं खारिज होने के बावजूद दिल्ली पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई. कोर्ट ने आदेश की एक कॉपी संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) को ‘जरूरी कार्रवाई’ के लिए भेजने का निर्देश दिया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी ‘आदतन अपराधी’ लगता है और कहा कि Supreme Court द्वारा पहले अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के बाद हालात में कोई बदलाव नहीं आया है.

यह मामला 2024 में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने सिविल सर्वेंट बनकर कई वरिष्ठ अधिकारियों से संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की थी.

उन पर पटना हाई कोर्ट के जज होने का नाटक करने का भी आरोप था. आरोपी के वकील ने दलील दी कि 2024 और 2025 में उनकी अग्रिम जमानत की अर्जियां खारिज होने और 8 सितंबर, 2025 को Supreme Court द्वारा उनकी स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) खारिज किए जाने के बावजूद, जांच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया, जिससे पता चलता है कि कस्टडी में पूछताछ की जरूरत नहीं थी.

हालांकि, सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी की मौजूदगी में एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने चिंता जताई कि Supreme Court द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बावजूद, आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई.

अपने आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट ने दर्ज किया कि आरोपी कई राज्यों में दर्ज कई आपराधिक मामलों में शामिल था, जिसमें गुरुग्राम में पटना हाई कोर्ट के जज होने का नाटक करने और एक सीबीई मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया का चेयरमैन बनकर एक व्यक्ति से 80 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप शामिल हैं.

कोर्ट ने हरियाणा, बिहार, पंजाब और चंडीगढ़ में दर्ज कई अन्य एफआईआर पर भी ध्यान दिया, जिनमें धोखाधड़ी, पहचान छिपाकर गलत काम करना, जालसाजी और उससे जुड़े अपराधों के आरोप थे.

आदेश में यह भी कहा गया कि Supreme Court पहले ही अग्रिम जमानत देने को सही नहीं मान चुका है और उसके बाद से हालात में कोई बदलाव नहीं आया है.

एमएस/