राम मंदिर चंदा विवाद की सीबीआई जांच की मांग, पूर्व डीजीपी बोले-‘भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

लखनऊ, 18 जून . अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित धन हेराफेरी के मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन ने गुरुवार को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने मामले की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की सिफारिश की.

पूर्व डीजीपी अरविंद कुमार जैन ने समाचार एजेंसी से विशेष बातचीत में कहा, “यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है जो लंबे समय से चल रहा है. मामले में तुरंत केस दर्ज होना चाहिए. मेरी मांग है कि जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि बाहरी और निष्पक्ष अधिकारी इसकी छानबीन कर सकें. जब से मंदिर के लिए भूमि अर्जन शुरू हुआ है, तब से आरोप लगते आ रहे हैं. जनता को पूरा सच जानना है.”

जैन ने आगे कहा कि कोषाध्यक्ष को खुद आगे आकर मुकदमा दर्ज कराना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा, “मुख्यमंत्री ने कमेटी गठित कर सात दिनों में रिपोर्ट मांगी है, यह अच्छा कदम है. लेकिन भारत के कानून से ऊपर कोई नहीं है. जो दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो, जो नहीं जुड़े उन्हें बचाया जाए. लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.”

राम मंदिर चंदे विवाद पर पूर्व डीजीपी ने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ लोग 200 करोड़ रुपए की बात कर रहे हैं तो कुछ अलग-अलग आंकड़े बता रहे हैं. उन्होंने कहा, “सच सामने आना चाहिए, वरना भविष्य में मंदिर को मिलने वाले दान पर असर पड़ेगा. लोग हर चीज पर शक करने लगेंगे. गिनती में शामिल सभी बैंक कर्मचारियों और स्टाफ के बयान दर्ज किए जाएं. टीम बदली जाए. दोषियों से पूरी रिकवरी हो. अगर गैंग बनाकर काम हुआ है तो गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. हमें एक पारदर्शी व्यवस्था बनानी होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं.”

गाजियाबाद से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस मामले में समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा, “अब साफ हो गया है कि इसमें समाजवादी पार्टी का एक कार्यकर्ता शामिल था. उनका एजेंडा है कि ऐसे लोगों को अंदर घुसाकर राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय और धार्मिक कार्यों में रुकावटें पैदा की जाएं.”

गुर्जर ने कहा कि जब तक सपा के अपने लोग सामने नहीं आए थे, तब तक अखिलेश यादव दोषियों को पकड़ने की मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा, “जैसे ही उनके लोगों के नाम सामने आए, उन्होंने एसआईटी जांच का विरोध शुरू कर दिया. यह उनके दोहरे चरित्र को दिखाता है. उत्तर प्रदेश सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं. किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. इसी वजह से सपा नेता एसआईटी जांच से असहज हैं.”

एससीएच/डीकेपी