
कोलकाता, 14 सितंबर . इस साल अब तक पश्चिम बंगाल में डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या 5,000 से ज्यादा हो गई है. इसे देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 29 नगर पालिकाओं, 85 कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक और 278 ग्राम पंचायतों को हॉटस्पॉट के तौर पर पहचाना है.
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग के कर्मचारी इन नगर पालिकाओं, ब्लॉक और पंचायतों में ज्यादा गहन और रैंडम ब्लड सैंपल टेस्ट पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि पिछले महीने डेंगू-पॉजिटिव मामलों की सबसे ज्यादा संख्या इन्हीं हॉटस्पॉट से सामने आई है.
उनके अनुसार, विभाग ऐसे हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए एक खास फॉर्मूला अपना रहा है. अधिकारी ने कहा, “जिस ग्राम पंचायत में डेंगू के 10 या उससे ज्यादा मरीज होते हैं, उसे हॉटस्पॉट पंचायत माना जाता है. इसी तरह, अगर किसी कम्युनिटी ब्लॉक में 30 से ज्यादा लोगों को डेंगू है, तो उसे हॉटस्पॉट ब्लॉक माना जाता है. अगर किसी नगरपालिका के ज्यादातर वार्डों में डेंगू से प्रभावित पांच या उससे ज्यादा लोग हैं, तो उसे हॉटस्पॉट माना जाता है.”
साथ ही, उन्होंने कहा कि विभाग इन हॉटस्पॉट पर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चला रहा है. लोगों से कहा जा रहा है कि अगर उनमें डेंगू के लक्षण दिखें – जैसे कि दो या उससे ज्यादा दिनों तक लगातार बुखार रहना – तो वे खुद आगे आकर ब्लड टेस्ट करवाएं.
अधिकारी ने कहा, “हमें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि इनमें से कई हॉटस्पॉट में, दो या उससे ज्यादा दिनों तक बुखार रहने पर लोग अक्सर किसी डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही दवा ले लेते हैं. इससे संकट और बढ़ रहा है. इसलिए, हम बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं कि दो या उससे ज्यादा दिनों तक बुखार रहने पर खुद दवा न लें, बल्कि ब्लड टेस्ट के लिए नजदीकी हेल्थ सेंटर जाएं या किसी डॉक्टर से सलाह लें.”
इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी डेंगू को रोकने के लिए घर-घर जाकर निगरानी कर रहे हैं. “स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों से कह रहे हैं कि वे घर की पानी की टंकियों और सिस्टर्न को ढंककर रखें. अगर ढक्कन नहीं है, तो उन्हें मच्छरदानी या जाली से ढंक देना चाहिए.” राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा, “छत पर रखे गमलों और बेकार पड़े डिब्बों में पानी जमा होने से रोकने के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है.”
स्वास्थ्य विभाग तालाबों, नालियों, पूलों, सूखी नहरों, बेकार पड़े कुओं और कारखानों की भी निगरानी कर रहा है. गाइडलाइंस के मुताबिक लार्वा-मारने वाली दवाओं (लार्विसाइड्स) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने अपना ताज़ा डेंगू बुलेटिन जारी किया, जिसमें 11 सितंबर तक 5,002 लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दी गई. हालांकि, चिंता की बात यह है कि अगस्त में इसी तारीख तक डेंगू से प्रभावित लोगों की कुल संख्या 2,500 से कम थी. इसका मतलब है कि पिछले एक महीने में 2,500 और लोग डेंगू की चपेट में आए हैं.
विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक सबसे ज़्यादा प्रभावित लोग मुर्शिदाबाद जिले से हैं (1,072), इसके बाद कोलकाता (500) और नॉर्थ 24 परगना (450) का नंबर आता है.
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पीआईएम/पीएम