
तिरुवनंतपुरम, 12 अगस्त . केरल के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को सबरीमाला में घी की खरीद और सप्लाई में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच की मांग की. उन्होंने सवाल उठाया कि एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट कैसे मिला और किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा किया.
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को लिखे एक पत्र में मुरलीधरन ने कहा कि देवस्वोम विजिलेंस एसपी और देवस्वोम सचिव की जांच से घी के सौदे में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं.
केरल हाई कोर्ट के निर्देश पर स्पेशल विजिलेंस टीम पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन मंत्री ने उन पहलुओं की भी व्यापक जांच की मांग की है, जो अभी चल रही जांच में शामिल नहीं किए गए हैं.
यह कदम इसलिए अहम है, क्योंकि सबरीमाला में इस्तेमाल के लिए सप्लाई किया जाने वाला घी सीधे तौर पर मंदिर के पवित्र प्रसाद को तैयार करने से जुड़ा है.
इसकी खरीद, गुणवत्ता या वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता के नतीजे सामान्य अनुबंध संबंधी विवाद से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं.
मंत्री के अनुसार, जिन हालात में एक ऐसी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया, जिसे पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, उन पर बारीकी से जांच की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि इस फैसले को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता और इससे खरीद प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार लोगों की किसी बड़ी साजिश में शामिल होने की संभावना भी पैदा होती है.
मुरलीधरन ने गृह विभाग से आग्रह किया है कि वे इस मामले के अनसुलझे पहलुओं की जांच एक विशेष जांच दल को सौंप दें.
यह मांग ऐसे समय में उठी है, जब हाई कोर्ट की निगरानी में विजिलेंस जांच चल रही है, जिसमें घी के लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है.
मंत्री ने खास तौर पर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि मौजूदा विजिलेंस जांच में कोई ओवरलैप या दखल न हो. साथ ही उन मुद्दों की अलग से जांच की मांग की है, जो इसके दायरे से बाहर रहे हैं.
व्यापक जांच की मांग से सबरीमाला घी विवाद के फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक जांच के दायरे में आने की संभावना है.
इससे त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड की ओर से कॉन्ट्रैक्ट देने में अपनाई जाने वाली आंतरिक जांच-पड़ताल की प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठते हैं. साथ ही, यह भी सवाल उठता है कि क्या किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को मंदिर से जुड़ी संवेदनशील खरीद प्रक्रिया में शामिल होने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए थे.
खुद मंत्री के एक बड़ी साजिश की संभावना जताने के बाद अब ध्यान इस बात पर जा सकता है कि कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी किसने दी, कंपनी को हिस्सा लेने की इजाजत कैसे मिली और क्या अधिकारियों ने मौजूदा सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया या उन्हें दरकिनार किया.
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एसएचके/डीकेपी