
नई दिल्ली, 15 अगस्त . 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत’ का संकल्प दोहराया है. उन्होंने कहा कि जब 2047 में आजादी के 100 साल होंगे, तब हम ‘विकसित भारत’ बनाकर रहेंगे. 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है.
कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, तब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है, जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है. अब छोटे सपनों से चलने वाला नहीं है. हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं. हमारी सोच के क्षितिज को विस्तृत करते हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए. जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाईयों और आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है. हमारे संकल्प भी ऊंचे होने चाहिए, क्योंकि जब सपने और संकल्प ऊंचे होते हैं तो हमारे सामर्थ्य और प्रयासों की ऊंचाई भी बढ़ती है, तब जाकर हम सपनों को साकार कर सकते हैं.
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत ने भी दृढ़ संकल्प के साथ एक बहुत बड़ा सपना देखा है. यह सपना नई ऊंचाईयों को छूने के लिए देखा है. यह सपना है ‘जब 2047 में आजादी के 100 साल होंगे, तब हम ‘विकसित भारत’ बनाकर रहेंगे. 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हमें हासिल करना है.
पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश ‘विकसित’ होने का संकल्प लेता है, तो यह दुनिया की नजरों में भी हमारे साहस का परिचायक बन जाता है. दुनिया की हमारी तरफ देखने का नजरिया बदलने के लिए मजबूर हो जाती है.
उन्होंने कहा, “यह मैं ऐसे ही नहीं कर रहा हूं. पिछले 12 सालों में देशवासियों ने एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में हर प्रकार से प्रयास किया है. मैं उनके प्रयासों को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं. यह उसी का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी को पार करके गरीबी से बाहर निकलने हैं. इन्हीं देशवासियों के प्रयासों का परिणाम है कि हम तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुके हैं.”
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश बहुत सारे सपने लेकर आजाद हुआ था, लेकिन हम गति नहीं पकड़ पाए. ‘होती है, चलती है, हो जाएगा, देखा जाएगा’, उसी में खोए रहते थे. ऐसे समय पिछले 12 साल में भारत ने नई रफ्तार पकड़ी है. तेज गति से हम आगे बढ़ रहे हैं और अब 140 देशवासियों के संकल्प और सामर्थ्य को रोकना नामुमकिन है.
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