
नई दिल्ली, 11 जुलाई . भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने टीम के कुछ सबसे मुश्किल पलों में पूर्व कप्तान रोहित शर्मा की कप्तानी की प्रशंसा की है. उन्होंने कहा कि रोहित की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा और ईमानदारी से बातचीत करके भरोसा बनाने की क्षमता ने दर्दनाक हार के बाद ड्रेसिंग रूम को एक साथ रखने में मदद की.
अभिषेक नायर ने जियोस्टार पर राष्ट्रीय टीम के साथ अपने समय को याद करते हुए रोहित की कप्तानी की प्रशंसा की.
नायर ने कहा, “हमारे पास कप्तान के तौर पर रोहित शर्मा थे. मुझे याद है कि वह मुंबई टेस्ट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए और कहा, ‘कोई बात नहीं. हमने बहुत सी सीरीज जीती हैं, हम यह एक हार गए हैं. मैं इसकी जिम्मेदारी लूंगा.’ रोहित ऐसे ही थे. उनमें हमेशा एक ऐसी बात थी जो माहौल को हल्का कर सकती थी और यह पक्का कर सकती थी कि टीम ठीक रहे.”
उन्होंने बताया कि रोहित शर्मा ने टीम के पक्ष में परिणाम न रहने की स्थिति में भी हमदर्दी, जवाबदेही से टीम के साथियों पर दबाव कम किया और आत्मविश्वास बढ़ाया. पूर्व कप्तान की एक खासियत यह थी कि हार के बाद ड्रेसिंग रूम को बचाने की उनकी आदत थी, उन्होंने किसी एक पर इल्जाम लगाने के बजाय खुद आलोचना झेली.
नायर ने कहा, “बेशक, जब भी भारत हारता है, तो सबको दुख होता है. लेकिन एक चीज जो उन्होंने बहुत अच्छे से की, वह थी अपने खिलाड़ियों का ध्यान रखना. वह सोचते थे कि सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ा है, किसने रन नहीं बनाए हैं, और वह उन्हें कैसे बेहतर महसूस करा सकते हैं. रोहित की जो बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई, वह यह थी कि वह हमेशा जिम्मेदारी लेते थे. वह कभी किसी पर यह कहकर इल्जाम नहीं लगाते थे, ‘तुमने यह किया’ या ‘तुमने वह किया.’ इसके बजाय, वह हाथ उठाकर कहते थे, ‘मैं फेल हो गया.’ आप उन्हें कभी बहाने बनाते या किसी को नीचा दिखाते नहीं सुनेंगे.”
पूर्व कोच ने कहा कि रोहित का मैदान पर असर तकनीकी फैसलों से कहीं ज्यादा था. उन्होंने कप्तान की सीधी बातचीत और अपने साथियों के लिए सच्ची चिंता को ड्रेसिंग रूम में उनके भरोसे की नींव बताया.
उन्होंने कहा, “मुझे सिडनी टेस्ट याद है जब रोहित नहीं खेले थे. फिर भी वह आए, इंटरव्यू दिया, और वही कहा जो उन्हें कहना था. उन्होंने कभी किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया. इसीलिए टीम ने उन पर भरोसा किया. आज भी किसी भी युवा क्रिकेटर से पूछिए, और वे रोहित शर्मा की कप्तानी के बारे में बहुत प्यार से बात करेंगे. वे आपको बताएंगे कि जब उन्होंने उन्हें डांटा भी, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया क्योंकि वे जानते थे कि यह भरोसे और सच्ची देखभाल से आया था.”
अभिषेक ने कहा, “एक कप्तान के तौर पर, उनका संवाद बहुत अच्छा था. संजू सैमसन ने भी बारबाडोस में टी20 विश्व कप फाइनल से बाहर होने के बाद इस बारे में बात की थी. भले ही संजू नहीं खेल रहे थे, रोहित ने टॉस से पहले उनसे बात की, क्योंकि उन्हें चिंता थी कि वह कैसा महसूस कर रहे हैं. वे मुश्किल दौर थोड़े आसान थे क्योंकि रोहित शर्मा आसपास थे.”
–
पीएके