केरल: पीएम श्री योजना पर फिर से चर्चा शुरू, केंद्र सरकार ने पत्र लिखकर लागू करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा

तिरुवनंतपुरम, 11 सितंबर . केरल में पीएम श्री योजना पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है. केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार को दूसरी बार पत्र लिखकर इसके लागू होने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है. सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन की ओर से पुष्टि की गई है कि मुख्य सचिव को केंद्र का नया पत्र मिल गया है.

एन. शम्सुद्दीन ने कहा कि सरकार के कोई भी फैसला लेने से पहले जरूरी बातचीत की जाएगी. उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सरकारी स्तर पर और गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और अपना रुख बताएंगे. मैं अकेले कोई फैसला नहीं ले सकता.”

मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने आगे कहा कि सरकार इस बात पर विचार करेगी कि पीएम श्री को पूरी तरह से खारिज कर दिया जाए या कुछ शर्तों के साथ इसे आगे बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा कि इसके भविष्य का फैसला मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की अगुवाई में बातचीत के बाद किया जाएगा.

बता दें कि हाल ही में कांग्रेस नेतृत्व के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है. जहां, नेताओं का एक वर्ग चाहता था कि सरकार इस योजना को छोड़ दे, वहीं माना जाता है कि मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा है कि इससे पूरी तरह पीछे हटना आसान नहीं हो सकता.

यह योजना तब पहली बार बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बनी थी जब पिछली पिनाराई विजयन सरकार सत्ता में थी.

आखिरकार राज्य ने 2025 में केंद्र के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए. इस फैसले की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि इसे एलडीएफ के भीतर पर्याप्त बातचीत के बिना लिया गया था.

लेफ्ट फ्रंट की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी सीपीआई ने इसका जोरदार विरोध किया, जिससे सरकार को बाद में इसे लागू करने का काम रोकना पड़ा और मामले की जांच के लिए कैबिनेट की एक उप-समिति बनानी पड़ी. मौजूदा सरकार अब मुश्किल स्थिति में है. यूडीएफ ने चुनावों से पहले और बाद में इस योजना का विरोध किया था. विपक्ष के तत्कालीन नेता सतीशन ने पिछली सरकार के इस कदम का खास तौर पर विरोध किया था.

हालांकि, शम्सुद्दीन ने आर्थिक पहलू की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि केंद्र से केरल को लगभग 2,000 करोड़ रुपये मिलने बाकी हैं. ‘समग्र शिक्षा केरल’ का फंड शिक्षा विभाग की रीढ़ था और उसे रोक दिया गया था. उन्होंने कहा, “हमने केंद्रीय मंत्री से कहा है कि पीएम श्री के नाम पर केरल का फंड नहीं रोका जाना चाहिए.”

केंद्र का कहना है कि केरल ने अक्टूबर 2025 में पीएम श्री एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद राज्य ने इसे लागू करने से रोक दिया था. दिल्ली से मिले नए संदेश के बाद, यह मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. अब सतीशन सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इस योजना के प्रति अपने पुराने विरोध और केंद्र से केरल की बड़ी वित्तीय मांगों के बीच संतुलन कैसे बनाए.

एसडी/एएस