
मुंबई, 24 सितंबर . दिशा सालियन मामले में वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक पेन ड्राइव सौंपी है, जिसमें दो कथित चश्मदीदों के बयान और तीन वीडियो मौजूद हैं. ओझा ने कहा कि इन बयानों में आदित्य ठाकरे और अन्य आरोपियों की कथित भूमिका से जुड़े गंभीर आरोप हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में पुलिस के साथ मिलकर कथित तौर पर कवर-अप किया गया.
ओझा ने को बताया कि मैंने सीबीआई को पहले ही पत्र के माध्यम से इन तथ्यों की जानकारी दी थी. अब पेन ड्राइव के जरिए मामले से जुड़े तीन महत्वपूर्ण गवाहों की जानकारी भी दी गई है, जिनमें दो आई-विटनेस हैं. जांच प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा रही हैं.
ओझा ने असलम शेख के एक कथित कार्यकर्ता नावेद मुजावर के बयानों को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि मुजावर के पुलिस के सामने दिए बयान और बाद में रिकॉर्ड किए गए वीडियो बयान में विरोधाभास है. पुलिस के बयान में मुजावर ने कहा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद था और उसने दिशा को ऊपर से गिरते हुए देखा. उसी बयान में दिशा के कपड़ों का उल्लेख लाल टी-शर्ट और क्रीम रंग की पैंट के तौर पर किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि मुजावर के एक अन्य वीडियो बयान में समय और कपड़ों को लेकर अलग जानकारी सामने आती है. इन विरोधाभासों से गवाह के बयान पर सवाल उठते हैं.
ओझा ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए समय को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि एक ओर यह दावा किया गया कि दिशा के गिरने की घटना रात करीब 1:20 बजे हुई, जबकि सीसीटीवी फुटेज में पुलिस रात करीब 12:50 बजे घटनास्थल पर दिखाई देती है. इस आधार पर घटनाक्रम को लेकर पहले दिए गए कुछ बयानों पर सवाल खड़े होते हैं. मामले की पूरी सच्चाई और इन बयानों के बीच विरोधाभास की जांच सीबीआई को करनी है.
ओझा ने बताया कि मामले से जुड़े लोगों को कथित धमकियों को देखते हुए चार व्यक्तियों को पुलिस सुरक्षा देने की मांग की गई है. इनमें समीर वानखेड़े, सतीश सालियन, आशुतोष पाठक और स्वयं नीलेश ओझा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी सीबीआई को पत्र दिया गया है. उन्होंने आगे कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में सबूत उपलब्ध कराने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी. अब सीबीआई को सबूत उपलब्ध करा दिए गए हैं और पेन ड्राइव से जुड़ी औपचारिकता पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए.
उन्होंने जांच प्रक्रिया का हवाला देते हुए संदिग्धों की जल्द गिरफ्तारी, जरूरत पड़ने पर लुकआउट नोटिस जारी करने और अदालत से गिरफ्तारी वारंट लेने की मांग की. ओझा ने आगे कहा कि पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री और गवाहों के बयानों की जांच अब सीबीआई को करनी है. मामले से जुड़े कुछ तथ्यों को वह फिलहाल सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं और जांच एजेंसी के सामने उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
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पीएसके