दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल की पहचान, हमें भाजपा से नहीं चाहिए ज्ञान : अधीर रंजन चौधरी

कोलकाता, 29 अगस्त . कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल की पहचान है. इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है. इस पूजा के दौरान बलि प्रथा है. लेकिन, अफसोस की बात है कि भाजपा अब इसे लेकर भी लोगों को गुमराह करने पर आमादा है.

उन्होंने कहा कि हमें भाजपा से किसी भी प्रकार के सलाह की जरूरत नहीं है कि हमें क्या करना है और क्या नहीं. हमारा भाजपा के लोगों को यही सुझाव है कि वो अपने विचारों को अपने पास ही रखें. अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में मेरे एक साथी ने मुझसे पूछा था कि आप शाकाहारी हैं या मांसाहारी, तो मैंने कहा कि हम सब खाते हैं. अब आप हमें जो कह सकते हैं, कह दीजिए. मछली पश्चिम बंगाल में सब्जी की ही तरह है. हमें भाजपा के लोगों से यही कहना है कि मेहरबानी करके हमें किसी भी प्रकार का ज्ञान मत दीजिए. हमें जितना ज्ञान चाहिए था, मिल चुका है.

कांग्रेस नेता ने जेलों में कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि हिंदुस्तान की जेलों में कैदियों को फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएं दी जाती हैं. कैदियों को बिल्कुल भी एहसास नहीं हो पा रहा है कि वो जेलों में हैं, क्योंकि वहां रहने वाले कैदी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि पैसों के दम पर सबकुछ खरीदा जा सकता है, इसलिए बेखौफ होकर सब काम कर पा रहे हैं. अब हम इन्हीं सब व्यवस्था के खिलाफ मौजूदा समय में लड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के सीएम के पास हर प्रकार का अधिकार है. उनके हाथ में पुलिस प्रशासन की शक्ति सहित तमाम तरह के अधिकार हैं. अगर वो चाहें तो राज्य से पूरी तरह से अपराध से निपटा जा सकता है. अब आपके पास मौका है. उसे करके दिखाइए. उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा में बच्चों की मौत को भी दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के मंत्रियों को फौरन ठोस कार्रवाई करनी चाहिए. अगर शहर के अंदर इस तरह की घटना हो रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इससे यह साफ जाहिर होता है कि पश्चिम बंगाल में सरकार परिवर्तन होने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बदतर बनी हुई है. सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.

एसएचके/एबीएम