
किंशासा, 1 अगस्त . डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इस बार इबोला वायरस अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला प्रकोप बन गया है. लगातार बढ़ते संक्रमण ने देश के पूर्वी हिस्से में लोगों की जिंदगी को गहरे संकट में डाल दिया है. अब तक 3,442 लोगों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,521 लोगों की मौत हो चुकी है. यानी संक्रमितों में मृत्यु दर लगभग 45 प्रतिशत है.
डीआरसी के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार यह संक्रमण अब पूर्वी कांगो के पांच प्रांतों तक फैल चुका है, जहां वर्षों से जारी हिंसा और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से ही भारी दबाव है.
कांगो सरकार ने इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की थी. इसके बाद से बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का यह वायरस देश में पहले आए सभी 16 इबोला प्रकोपों की तुलना में अधिक तेजी से फैला है. संक्रमण के मामले अब 2018-20 के उस बड़े प्रकोप के आंकड़ों के करीब पहुंच चुके हैं, जब 3,470 लोग संक्रमित हुए थे.
यूएन ने भी गुरुवार को कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बीमारी तेजी से फैल रही है; इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है और हर 20 दिन में मामलों की संख्या दोगुनी हो रही है. संयुक्त राष्ट्र इस स्थिति से निपटने में मदद कर रहा है, लेकिन उसने चेतावनी दी है कि यह महामारी पहले से ही गंभीर मानवीय संकट को और बदतर बना रही है.
संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने निगरानी व्यवस्था मजबूत की है, 20 से अधिक इबोला उपचार केंद्र स्थापित किए हैं और स्थानीय स्तर पर जांच प्रयोगशालाएं बनाई हैं. लोगों से अपील की जा रही है कि इबोला के मामूली लक्षण दिखाई देने पर भी तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें ताकि संक्रमण की श्रृंखला को समय रहते रोका जा सके. इसके बावजूद बुनिया और रवामपारा जैसे स्वास्थ्य क्षेत्रों में हर सप्ताह 100 से 150 नए संक्रमित सामने आ रहे हैं.
जुलाई की शुरुआत में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ विकसित की गई नई वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुआ है. इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई मानक इलाज उपलब्ध नहीं है. 15 जुलाई तक लगभग 20 वॉलिंटियर्स को इस परीक्षण में शामिल किया जा चुका था और वैज्ञानिकों का अनुमान है कि परीक्षण पूरा होने में लगभग चार महीने लग सकते हैं.
उधर, हाल ही में अपने यहां इबोला प्रकोप खत्म होने की घोषणा करने वाले युगांडा ने भी कांगो की मदद के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजी है. ये विशेषज्ञ विशेष रूप से सीमा से लगे टचोमिया और कासेनी क्षेत्रों में कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर संक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण की रफ्तार नहीं थमी, तो यह प्रकोप कांगो के इतिहास का सबसे भयावह इबोला संकट बन सकता है.
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केआर/