आईपैक छापेमारी मामला: ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर 18 अगस्त को होगी सुनवाई

नई दिल्ली, 22 मई . आई-पैक रेड मामले में ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर Supreme Court अब 18 अगस्त को सुनवाई करेगा. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा Supreme Court में छुट्टियों के बाद इस मामले पर वकीलों की फिजिकल मौजूदगी में सुनवाई की जाएगी.

दरअसल, आईपैक रेड के दौरान उस समय की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के द्वारा ईडी अधिकारियों की काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए ईडी ने Supreme Court में याचिका दाखिल की थी. याचिका में ईडी ने ममता बनर्जी, राज्य के तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार और तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है.

ईडी की याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस साल की शुरुआत में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आईपैक) के कोलकाता स्थित दफ्तर में तलाशी अभियान के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दखलअंदाजी की थी. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय किया था.

यह मामला 8 जनवरी को ईडी की ओर से आईपैक के दफ्तर और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकाने पर तलाशी अभियानों से जुड़ा है. ये तलाशी अभियान कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में किए गए थे.

एजेंसी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी, पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, आईपैक के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर में तब घुस गईं, जब वहां तलाशी चल रही थी और उन्होंने जांच में बाधा डाली. ईडी ने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान उसके अधिकारियों को रोका गया और डराया-धमकाया गया.

पिछली सुनवाई के दौरान, Supreme Court ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की ओर से चल रही जांच के बीच में कथित रूप से दखलअंदाजी करना लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है. जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने मौखिक रूप से कहा था, “यह अपने आप में राज्य और केंद्र के बीच का कोई विवाद नहीं है. यह अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति की ओर से किया गया कृत्य है, जो संयोग से एक राज्य का मुख्यमंत्री (तत्कालीन) है और जो पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है.”

एमएस/