इलावेनिल वालरिवन: 8वीं क्लास में जागी शूटिंग में रुचि, सरकार से मिला भरपूर सपोर्ट

अहमदाबाद, 20 सितंबर . इलावेनिल वालरिवन ने ‘एशियन गेम्स 2026’ में रविवार को देश के लिए दो सिल्वर मेडल जीते. इलावेनिल ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत इवेंट में सिल्वर पर निशाना साधा. इससे पहले, महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफ टीम स्पर्धा में देश को सिल्वर जिताने में अहम योगदान दिया.

वर्ल्ड कप 2019 में गोल्ड जीतने वालीं इलावेनिल ने व्यक्तिगत स्पर्धा में 252.4 प्वाइंट्स हासिल किए. जापान की हिनाता ताइची (253.0) ने गोल्ड मेडल हासिल किया, जबकि साउथ कोरिया की ह्योजिन बान (230.4) ने ब्रॉन्ज मेडल पर निशाना साधा.

वहीं, टीम स्पर्धा में तीन खिलाड़ियों ने मिलकर कुल 1898.0 का स्कोर हासिल करते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया. सोनम ने 634.1 के बेहतरीन स्कोर के साथ भारत के लिए क्वालिफिकेशन में तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि इलावेनिल 633.5 के स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रहीं. विदर्शा ने 630.4 का अच्छा स्कोर किया और व्यक्तिगत रैंकिंग में 12वें स्थान पर रहीं, जिससे भारत के लिए टीम सिल्वर मेडल सुनिश्चित हुआ.

मां सरोजा वालरिवन ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए ‘ ’ से कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है. भारत की पदक तालिका की शुरुआत हो गई है. एक ही दिन में दो मेडल देश की झोली में आए हैं. ये गुजरात और भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि इलावेनिल गुजरात से हैं, वो इधर से खेलती हैं.”

बेटी के तमिलनाडु की जड़ों से लेकर अहमदाबाद में शूटिंग करियर शुरू करने तक के इस सफर को लेकर मां सरोजा ने कहा, “इलावेनिल ने गुजरात से ही केजी से पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है. उन्होंने संस्कार धाम एंड डिवाइन बर्ड्स स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की. इस दौरान गुजराती ही उनकी प्रमुख भाषा रही. संस्कार धाम से उन्होंने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी पूरा किया. वह गुजरात यूनिवर्सिटी की छात्र है.”

माता ने बताया कि इलावेनिल ने इस मेडल के लिए करीब 14 साल मेहनत की है. उन्होंने कहा, “जब इलावेनिल आठवीं क्लास में थीं, तो पिता के एक दोस्त को देखकर शूटिंग में रुचि जागी. वह पहले स्कूल गेम्स में खेली थीं. इसके बाद गुजरात सरकार ने डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल (डीएलएसएस) योजना शुरू की, उस समय इलावेनिल संस्कार धाम में पढ़ रही थीं. इलावेनिल को गुजरात सरकार और भारत सरकार से भरपूर सहयोग मिला है. उन्होंने ‘खेल महाकुंभ’ और ‘खेलो इंडिया’ में भी हिस्सा लिया है. कोच नेहा चौहान और मेंटॉर गगन नारंग के साथ ‘गन फॉर ग्लोरी एकेडमी’ उनका सपोर्ट कर रही है. हम दोनों (माता-पिता) ने पीएचडी की है. हमारा बेटा आर्मी में है.”

उन्होंने देश की बेटियों को संदेश देते हुए कहा कि बच्चों को एक खेल चुनना ही चाहिए. पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी है. गुजरात सरकार खिलाड़ियों को पूरी तरह सपोर्ट कर रही है.

वहीं, पिता वालरिवन ने कहा, “हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है. हमें बहुत खुशी है कि हमारी बेटी ने भारत के लिए मेडल जीते हैं. पहले ही दिन भारत ने अपना खाता खोल लिया. हमारे खाते में दो मेडल आ गए हैं. दोनों ही मेडल में हमारी बेटी की भागीदारी रही है. इसलिए हम बहुत खुश हैं.”

पिता ने कहा, “हर छात्र और हर बच्चे को कम से कम एक खेल में जरूर हिस्सा लेना चाहिए. सिर्फ पढ़ाई से ही भविष्य नहीं बनता, खेल भी भविष्य बनाने में मदद करते हैं. इस मामले में गुजरात सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. सरकार ‘खेल महाकुंभ’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसे आयोजन कर रही है. वे ट्रेनिंग भी देते हैं और खेलों में हिस्सा लेने वालों को नौकरी भी देते हैं. इसलिए, हम सभी माता-पिता से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वे अपने बच्चों को किसी न किसी खेल में जरूर भेजें. उन्हें खेलों में भाग लेना चाहिए. सरकार उन्हें पूरा समर्थन देती है. अगर वे खेलों में भी शामिल होते हैं, तो उनका भविष्य काफी उज्ज्वल होगा.”

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आरएसजी