सांसद पद छोड़ने को तैयार इंजीनियर रशीद, अंतिम फैसला जनता की राय के बाद

श्रीनगर, 21 जून . जम्मू-कश्मीर की बारामूला लोकसभा सीट से सांसद और जेल में बंद इंजीनियर रशीद ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है. उनका कहना है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और जरूरतों पर प्रभावी ढंग से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. हालांकि, उनकी पार्टी अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) ने इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेने से पहले जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से राय लेने का निर्णय किया है.

एआईपी के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी द्वारा जारी बयान के अनुसार, पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति ने इस विषय पर विस्तृत चर्चा की. समिति ने तय किया कि बारामूला संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी 18 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी पदाधिकारियों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से व्यापक परामर्श किया जाएगा.

बयान में कहा गया कि इंजीनियर रशीद ने अपनी संसदीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करने और मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचने में असमर्थता जताई है. इसी कारण उन्होंने सांसद पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त की है. इस पर पार्टी ने दो दिवसीय परामर्श प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है, जिसमें यह राय ली जाएगी कि उन्हें सांसद बने रहना चाहिए या पद छोड़ देना चाहिए.

पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर कार्यकर्ताओं के बीच गुप्त मतदान (सीक्रेट बैलेट) कराया जा सकता है, ताकि सभी सदस्य बिना किसी दबाव के अपनी राय व्यक्त कर सकें.

एआईपी के अनुसार, पंचायत और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी आम जनता तथा समाज के विभिन्न वर्गों से भी संवाद करेंगे और उनकी राय एकत्र करेंगे. पार्टी का कहना है कि अंतिम निर्णय जनता की भावनाओं और उन मतदाताओं की इच्छाओं के अनुरूप होगा, जिन्होंने इंजीनियर रशीद और पार्टी पर भरोसा जताया था.

प्रवक्ता ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया और संभावित मतदान के नतीजों से इंजीनियर रशीद को औपचारिक रूप से अवगत कराया जाएगा, ताकि वह सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय ले सकें.

एआईपी ने दोहराया कि वह आंतरिक लोकतंत्र और जन-जवाबदेही के सिद्धांतों में विश्वास रखती है तथा महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता की सामूहिक राय के आधार पर लिए जाने चाहिए.

पार्टी का मानना है कि यह परामर्श प्रक्रिया इंजीनियर रशीद के संसदीय भविष्य को लेकर आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और अंतिम निर्णय में कार्यकर्ताओं तथा मतदाताओं की आवाज को सर्वोच्च महत्व दिया जाएगा.

डीएससी