
नई दिल्ली, 22 अगस्त . यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इजरायल की ई-1 बस्ती परियोजना के निर्माण टेंडर जारी करने के फैसले पर कड़ा एतराज जताया. उन्होंने कहा कि इजरायल सरकार का निर्माण टेंडर जारी करने का फैसला स्वीकार्य नहीं है और यूरोप लंबे समय से इसका विरोध करता रहा है. उन्होंने कहा कि यह कदम वेस्ट बैंक को विभाजित कर दो-राष्ट्र समाधान की राह को कमजोर करता है.
यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”इजरायल सरकार की ओर से ई-1 बस्ती (सेटलमेंट) परियोजना के लिए निर्माण टेंडर जारी करने का फैसला स्वीकार्य नहीं है. हम लंबे समय से इस कदम का विरोध करते रहे हैं. यह कदम दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) को कमजोर करता है, क्योंकि इससे वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाता है और फिलिस्तीनी क्षेत्रों की भौगोलिक एकता टूट जाती है. हम दो-राष्ट्र समाधान के आधार पर न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हैं.”
उन्होंने कहा कि ई-1 सेटलमेंट परियोजना के लिए निर्माण टेंडर जारी करने का फैसला स्वीकार्य नहीं है. अंतरराष्ट्रीय कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियां अवैध हैं. यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का स्थापित रुख है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी दोहरा चुकी है.
वेस्ट बैंक में पहले से ही गंभीर अस्थिरता का माहौल है. वहां बसने वाले कुछ लोगों की ओर से नागरिकों के खिलाफ अभूतपूर्व स्तर की हिंसा देखी जा रही है और फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर भी कड़े प्रतिबंध लगे हुए हैं. ऐसे समय में यह फैसला और भी अधिक चिंता पैदा करता है.
उन्होंने कहा कि हम इजरायल सरकार से अपील करते हैं कि वह इन योजनाओं को तुरंत वापस ले और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार को रोके. यह कदम न केवल शांति की संभावना को और दूर ले जाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि और स्थिति को भी नुकसान पहुंचाएगा.
उन्होंने कहा कि हम एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जो दो-राष्ट्र समाधान पर आधारित हो. उन्होंने व्यावसायिक कंपनियों से भी कहा कि कंपनियों को इन निर्माण टेंडरों में बोली लगाने पर विचार नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़े गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
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एवाई/एएस