
मुंबई, 16 अगस्त . समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने आर्टिकल 370, कश्मीर, केरल में राष्ट्रगान विवाद, वंदे मातरम, शहरों के नाम बदलने और नफरत की राजनीति जैसे कई मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि देश में विकास और भाईचारे की जरूरत है, न कि विभाजन की.
अबू आजमी ने आर्टिकल 370 पर से बातचीत करते हुए कहा, “जब 1947 में भारत आजाद हुआ तो उम्मीद थी कि कश्मीर भारत के साथ रहेगा. बातचीत हुई, लेकिन उस समय पाकिस्तान की तरफ से कबायली ताकतों ने कश्मीर पर हमला कर दिया. कश्मीर को मदद की जरूरत थी, इसलिए वहां के नेताओं ने मदद के लिए भारतीय नेतृत्व से संपर्क किया. भारतीय नेताओं ने कश्मीर को सुरक्षा और सैन्य मदद दी. हालांकि, इसमें एक शर्त भी शामिल थी, उसमें आर्टिकल 370 की भी बात थी, इसलिए ये लागू हो गया था.”
उन्होंने आगे कहा, “तय हुआ था कि जब विधानसभा रहेगी और वहां से आर्टिकल 370 हटाने का बिल पास हो जाएगा तो उसे हटा दिया जाएगा. सरकार ने 370 हटने के बाद घाटी से आतंकवाद खत्म होने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पिछले साल हमले में 26 लोग मारे गए और न ही कुछ विकास हुआ. सिर्फ और सिर्फ अल्पसंख्यक के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है.”
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस पार्टी द्वारा वंदे मातरम के कथित अपमान पर केरल में स्कूली बच्चों के राष्ट्रगान न गाने के मामले पर Supreme Court के फैसले का जिक्र किया. अबू आजमी ने कहा, “केरल में खबरों के मुताबिक दो बच्चों ने स्कूल में राष्ट्रगान नहीं गाया और शायद वे खड़े भी नहीं हुए. मुझे पूरी बात ठीक से याद नहीं है, लेकिन जहां तक मुझे याद है, उन्होंने न तो राष्ट्रगान गाया और न ही वे खड़े हुए. स्कूल ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. फिर Supreme Court ने आदेश दिया कि इस आधार पर उन्हें सस्पेंड नहीं किया जा सकता और यह देश के खिलाफ देशद्रोह का काम नहीं है.”
वंदे मातरम और धार्मिक भावनाओं के मुद्दे पर अबू आजमी ने कहा कि राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए. भाजपा नेता पंकजा मुंडे को लेकर उन्होंने कहा, “मैं पंकजा मुंडे का बहुत सम्मान करता हूं. जब भी मुझे किसी काम के लिए उनकी मदद की जरूरत होती है तो वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहती हैं. वह यह नहीं देखतीं कि कोई भाजपा का है या समाजवादी पार्टी का. अगर कोई इस बात की गवाही दे सकता है तो वह पाशा सैयद, यानी पाशा साहब हैं, जो पहले भाजपा के किसान नेता थे. मुंडे ने उन्हें वह पद दिलाने में मदद की थी और वह व्यक्तिगत रूप से समाजवादी पार्टी को पसंद करते थे. जब 2012 में हमारी सरकार सत्ता में आई तो हमने समाजवादी पार्टी को मजबूत करने और समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बारे में बातचीत की थी.”
शहरों के नाम बदलने और इतिहास को लेकर अबू आजमी ने कहा, “इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ता. नाम बदलने से न रोजगार मिलेगा, न शिक्षा, न अस्पताल. सरकार को चाहिए कि वह नफरत की राजनीति छोड़कर लोगों के मुद्दों पर ध्यान दे. महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा सबसे बड़े मुद्दे हैं.”
उन्होंने अंत में कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब में विश्वास रखती है. देश को आगे ले जाने के लिए सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलना होगा.
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एससीएच/डीकेपी