‘हाईकमान का हर फैसला स्वीकार होना चाहिए’, पंजाब कांग्रेस में मतभेद की चर्चाओं पर बोले कृष्ण कुमार बाबा

लुधियाना, 10 जुलाई . पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व चेयरमैन कृष्ण कुमार बाबा ने स्पष्ट कहा है कि पार्टी में अंतिम निर्णय हाईकमान का होता है और सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को किसी प्रतिस्पर्धा की भावना से नहीं, बल्कि मिलकर काम करते हुए कांग्रेस को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए.

मीडिया से बातचीत के दौरान कृष्ण कुमार बाबा ने कहा कि कांग्रेस में किसी भी पद को लेकर फैसला पार्टी नेतृत्व करता है और उस पर सार्वजनिक बयानबाजी उचित नहीं है. से बातचीत में उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सभी नेताओं की बात सुनने आए हैं और उन्होंने सबकी राय सुनी है. अगर किसी बदलाव की बात होती है तो उसका फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है. पंजाब कांग्रेस के किसी भी नेता को इस मामले में दखल देने या बयानबाजी करने की जरूरत नहीं है. अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को कांग्रेस कमेटी ने करीब तीन महीने की लंबी प्रक्रिया और सभी नेताओं से विचार-विमर्श के बाद जिम्मेदारी सौंपी है. ऐसे में बार-बार उसी फैसले पर सवाल उठाना उचित नहीं है. हाईकमान जो निर्णय ले, उसे सभी को स्वीकार करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं. विधायक अपनी राय रखते हैं और वरिष्ठ नेतृत्व सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय करता है. किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदारी देते समय उसकी कार्यशैली, त्याग, वरिष्ठता, क्षमता, देशभक्ति और विचारधारा जैसे पहलुओं को देखना चाहिए. कई बार जब हम इन बातों से हट जाते हैं तो नुकसान उठाना पड़ता है.

चन्नी और राजा वडिंग के बीच किसी प्रकार के टकराव की धारणा को खारिज करते हुए उन्होंने दोनों नेताओं से एकजुट होकर काम करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह चन्नी बनाम राजा का सवाल नहीं होना चाहिए. हमारे लिए सभी राजा हैं और सभी चन्नी हैं. मुझे तो लगता है कि दोनों नेताओं को कांग्रेस के पुराने चुनाव चिह्न ‘दो बैलों की जोड़ी’ की तरह मिलकर काम करना चाहिए. दोनों भाईचारे के साथ कांग्रेस को जीत दिलाएं और राहुल गांधी की झोली में पंजाब सौंपें. यही कांग्रेस की विचारधारा है. यदि हम राहुल गांधी को अपना नेता मानते हैं तो फिर झगड़े की कोई वजह नहीं रह जाती. राहुल गांधी का जो भी फैसला होगा, हम सभी को उसे स्वीकार करना चाहिए.

कांग्रेस में गुटबंदी के सवाल पर कृष्ण कुमार बाबा ने कहा कि पार्टी के भीतर गुटबाजी जैसी कोई स्थिति नहीं है और इस तरह की चर्चाओं को उन्होंने मीडिया की बनाई हुई धारणा बताया. उन्होंने कहा कि गुटबंदी शब्द ही बहुत खराब है. गुटबंदी तब होती है जब कोई पार्टी कई हिस्सों में बंट जाए. कांग्रेस में ऐसा कुछ नहीं है. हमारा नेता एक है, राहुल गांधी हैं और मल्लिकार्जुन खड़गे हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. फिर गुटबंदी कैसी? हम सब एक परिवार के सदस्य हैं. चन्नी भी यह कह चुके हैं कि वे राहुल गांधी के साथ हैं और जो फैसला राहुल गांधी करेंगे, उसे मानेंगे. ऐसे में गुटबंदी की बात ही नहीं बनती. यह चर्चा मीडिया ने खड़ी की है.

कृष्ण कुमार बाबा ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और राज्य सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार का पहला दायित्व लोगों के जान-माल की सुरक्षा करना होता है, लेकिन मौजूदा समय में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है. मोगा में बम धमाके जैसी घटनाएं हो रही हैं. सरकार का पहला संवैधानिक दायित्व लोगों की जान-माल की रक्षा करना है. इस दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है. उन्होंने महिलाओं से किए गए आर्थिक सहायता के वादों और सरकारी योजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया और लोगों को भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए.

कृष्ण कुमार बाबा ने केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि दोनों सरकारों को पंजाब के भविष्य और राज्य की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हर शब्द का महत्व होता है और उन्हें जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि खेती-बाड़ी विश्वविद्यालय, भाखड़ा डैम, पीजीआई, एम्स जैसी कई महत्वपूर्ण संस्थाएं और परियोजनाएं कांग्रेस की देन हैं. पंजाब की शांति स्थापित करने में भी कांग्रेस के नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. जनता को यह देखना चाहिए कि किस सरकार ने अपने कार्यकाल में क्या काम किया. पंजाब को वर्तमान परिस्थितियों से बाहर निकालने के लिए गंभीर और जिम्मेदार नेतृत्व की आवश्यकता है. केंद्र और राज्य सरकार दोनों को राज्य के हित में सोचने और जिम्मेदारी के साथ काम करने की जरूरत है.

पीएसके