आई-पैक छापेमारी विवाद: Supreme Court ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की ईडी की मांग पर सुरक्षित रखा फैसला

नई दिल्ली, 29 अक्टूबर . Supreme Court ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. मामला कोलकाता स्थित राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय में हुई ईडी की तलाशी के दौरान कथित हस्तक्षेप से जुड़ा है.

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए या फिर पश्चिम बंगाल की नई निर्वाचित सरकार खुद इस पर निर्णय ले.

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य में सरकार बदल चुकी है, इसलिए अब राज्य सरकार खुद तय कर सकती है कि जांच सीबीआई को सौंपनी है या नहीं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में Supreme Court के किसी विशेष आदेश की आवश्यकता नहीं है.

पीठ ने भी सवाल किया कि बदली हुई परिस्थितियों में पश्चिम बंगाल सरकार स्वयं मामले को सीबीआई को क्यों नहीं सौंप सकती. अदालत ने कहा कि जब ईडी ने याचिका दायर की थी, तब जो स्थिति थी, वह अब बदल चुकी है.

वहीं, ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि यदि फैसला राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया तो पक्षपात के आरोप लग सकते हैं. उनके अनुसार, मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के साथ-साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी आरोप हैं, इसलिए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है.

राजू ने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े कई क्रॉस-केस हैं, इसलिए सभी मामलों की जांच एक ही एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए ताकि पूरे विवाद की एक साथ जांच हो सके.

उन्होंने अदालत को बताया कि ईडी ने स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर ही Supreme Court का रुख किया है. यदि जांच को लेकर फैसला राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया तो बाद में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं.

सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद Supreme Court ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

यह मामला 8 जनवरी को ईडी द्वारा कोलकाता में आई-पैक ऑफिस और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर की गई तलाशी से जुड़ा है. यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी.

ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अफसरों के साथ वहां पहुंचीं और जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया.

एजेंसी ने ममता बनर्जी, तत्कालीन पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त मनो​ज कुमार वर्मा समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है.

ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि वह आई-पैक कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस से संबंधित गोपनीय और स्वामित्व वाले डेटा को सुरक्षित रखने के लिए गई थीं, जिसका संबंध पार्टी की चुनावी रणनीति से था.

15 जनवरी को Supreme Court ने इस मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी थी और परिसर से जुड़े सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था.

इससे पहले सुनवाई के दौरान Supreme Court ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि यदि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री किसी चल रही जांच में हस्तक्षेप करता है तो इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है.

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एएमटी/डीकेपी