केरल चुनाव में हार के बाद सीपीआई(एम) में घमासान, नेतृत्व पर उठी उंगलियां

तिरुवनंतपुरम, 3 सितंबर . केरल चुनाव के बाद सीपीआई(एम) में मंथन और तेज होता जा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता थॉमस आइजैक ने चुनावी हार पर अपनी स्पष्ट और आलोचनात्मक टिप्पणी पर कायम रहते हुए नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. वहीं पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता टी.के. गोविंदन ने भी सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व की आलोचना की है.

आईजैक ने गुरुवार को कहा कि उनकी टिप्पणियां पूरी तरह से पार्टी की केंद्रीय समिति की रिपोर्ट में निहित टिप्पणियों पर आधारित थीं और वह अपने कहे पर कायम हैं.

उन्होंने यह स्वीकार किया कि दस साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं में अहंकार आ गया था, जिससे संगठन के भीतर पहले ही बहस छिड़ गई थी.

पार्टी द्वारा अगले सप्ताहांत से शुरू होने वाली विस्तारित राज्य समिति की बैठक में रखे जाने वाले मुद्दों को अंतिम रूप देने की तैयारी के बीच आईजैक की स्थिति का महत्व और भी बढ़ जाता है.

राज्य सचिवालय और राज्य समिति से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उन प्रमुख संगठनात्मक और राजनीतिक प्रश्नों की पहचान करें जिन पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है.

इस बीच, गोविंदन, जिन्होंने सीपीआई (एम) से नाता तोड़कर बागी उम्मीदवार के रूप में तालिपारम्बा विधानसभा चुनाव लड़ा था, ने खुले तौर पर नेतृत्व को हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने की चुनौती दी है.

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के समर्थन से चुनाव लड़ते हुए गोविंदन ने सीपीआई (एम) की आधिकारिक उम्मीदवार और पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को हराया.

शीर्ष नेतृत्व की आलोचना करते हुए गोविंदन ने कहा कि सीपीआई (एम) और पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को चुनावी हार में योगदान देने वाली गलतियों को खुले तौर पर स्वीकार करना चाहिए.

उन्होंने विजयन के चहेते 56 वर्षीय कन्नूर सीपीआई (एम) जिला सचिव के.के. रागेश पर कड़ा प्रहार किया. गोविंदन ने कहा कि रागेश ने पार्टी में तब शुरुआत की थी, जब वे एक प्लंबर/इलेक्ट्रीशियन थे और उनकी वर्तमान संपत्तियों की जांच होनी चाहिए और उन्होंने स्वयं को भी जांच के लिए प्रस्तुत किया.

उन्होंने सवाल उठाया कि तालिपारम्बा में उम्मीदवार के चयन में खामियों के बारे में केंद्रीय समिति की टिप्पणी विजयन के पय्यानूर और तालिपारम्बा की यात्राओं के दौरान दिए गए भाषणों में क्यों नहीं परिलक्षित हुई.

गोविंदन का हस्तक्षेप विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि तालिपारम्बा चुनाव में महज एक और निर्वाचन क्षेत्र नहीं था.

वहां एक बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे पूर्व पार्टी नेता के हाथों आधिकारिक सीपीआई (एम) उम्मीदवार की हार चुनाव की सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील घटनाओं में से एक के रूप में उभर कर सामने आई है.

आईजैक और गोविंदन की प्रतिक्रियाएं वामपंथ की हार के कारणों पर बढ़ती बहस की ओर इशारा करती हैं.

जहां एक ओर आईजैक ने इस चर्चा को केंद्रीय समिति के अपने आकलन के ढांचे के भीतर रखने की कोशिश की है. वहीं गोविंदन मांग कर रहे हैं कि पार्टी द्वारा पहचानी गई गलतियों का सामना स्वयं नेतृत्व करे.

सीपीआई (एम) समर्थित टेलीविजन चैनल कैराली टीवी के समाचार संपादक और एक वरिष्ठ पत्रकार शैमी प्रभाकर द्वारा फेसबुक पर एक पोस्ट ने अब सीपीआई (एम) समर्थकों के बीच तीव्र बहस छेड़ दी है.

पिछले दस वर्षों के वामपंथी शासन की प्रशंसा करते हुए पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की गई है कि वे कथित तौर पर वर्तमान झटके की गंभीरता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

राज्य नेतृत्व अब विस्तारित राज्य समिति की बैठक के लिए एजेंडा तैयार कर रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या ये आलोचनाएं व्यापक संगठनात्मक समीक्षा में परिणत होंगी या चुनाव के बाद की असहमति तक ही सीमित रहेंगी.

एसएचके/वीसी