भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर से नौसैनिक जहाज रोधी मिसाइल का हुआ पहला सफल प्रक्षेपण

नई दिल्ली, 29 अप्रैल . रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय नौसेना ने ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट से दूर भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से नौसैनिक लघु-श्रेणी रोधी मिसाइल (एनएएसएम-एसआर) का पहला सफल प्रक्षेपण किया. परीक्षण के दौरान एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें त्वरित गति से दागी गईं, जो इस उन्नत वायु-प्रवेशित जहाज-रोधी मिसाइल प्रणाली का पहला सामूहिक प्रक्षेपण था.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसैनिक लघु-श्रेणी रोधी मिसाइल के पहले सफल प्रक्षेपण के लिए डीआरडीओ, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना और उद्योग जगत के साथ-साथ डीसीपीपी भागीदारों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के विकास से सशस्त्र बलों की क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी.

इससे पहले, वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान की तरफ से डिजाइन और विकसित किए गए उन्नत बख्तरबंद प्लेटफार्म (ट्रैक और पहिएदार) का अनावरण रक्षा विभाग (अनुसंधान एवं विकास) के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने 25 अप्रैल को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला में किया था. इन प्लेटफार्मों को रक्षा बलों की उभरती परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है. दोनों प्लेटफॉर्म स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित 30 मिमी क्रूलेस टरेट से लैस हैं, जिनमें गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्नत विशेषताएं हैं. उच्च शक्ति वाले इंजन और स्वचालित ट्रांसमिशन से सुसज्जित, इन प्लेटफार्मों में उच्च शक्ति-भार अनुपात, उच्च गति क्षमता, ढलान और बाधाओं को पार करने की क्षमता, मॉड्यूलर विस्फोट और बैलिस्टिक सुरक्षा के साथ एसटीएएनएजी स्तर 4 और 5 की सुरक्षा है. हाइड्रो जेट्स को शामिल करके जलबाधित बाधाओं को पार करने की बेहतर क्षमता वाला उभयचर मॉडल परिचालन लचीलापन प्रदान करता है.

30 मिमी क्रूलेस बुर्ज और 7.62 मिमी पीकेटी गन को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने के लिए भी कॉन्फिगर किया गया है. मूल डिजाइन को कई भूमिकाओं के लिए कॉन्फिगर किया जा सकता है. इसमें 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है और इसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत करने की योजना है.

इन प्लेटफार्मों का निर्माण दो उद्योग साझेदारों – टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड द्वारा कई लघु एवं मध्यम उद्यमों के सहयोग से किया गया है. इस सहयोग से विकसित हो रहे रक्षा तंत्र को मजबूती मिली है.

ओपी/डीकेपी