नेपाल बाढ़ के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर फोकस, जनजीवन पटरी पर लाने की तैयारी

काठमांडू, 4 सितंबर . नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के एक सप्ताह से अधिक समय बाद अब सरकार और स्थानीय प्रशासन जनजीवन को फिर से पटरी पर लाने तथा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों के पुनर्निर्माण की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं. इस आपदा में अब तक कम से कम 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं.

बिदुर नगर पालिका के मेयर राजन श्रेष्ठ ने से कहा कि नेपाल के लोगों ने अपने जीवन में प्राकृतिक आपदा से इतनी व्यापक तबाही पहले कभी नहीं देखी.

उन्होंने कहा, “संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है. बिदुर नगर पालिका सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में है. हमारी नगर पालिका के 13 वार्डों में से 10 पूरी तरह प्रभावित हुए हैं.”

मेयर ने बताया कि बचाव और राहत अभियान अभी भी जारी है. नगर पालिका क्षेत्र में 17 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां फिलहाल 3,000 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं.

उन्होंने कहा, “अब नगर पालिका का ध्यान बाढ़ में नष्ट हुई संपत्तियों के पुनर्निर्माण और बहाली की योजना पर है.”

राजन श्रेष्ठ ने आपदा के बाद सबसे पहले सहायता पहुंचाने के लिए भारत का आभार भी जताया. उन्होंने कहा, “शुरुआत से ही भारत हमारा सच्चा मित्र रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा नेपाल के लोगों और उनके हितों के साथ खड़े रहे हैं. 2015 के भूकंप की तरह इस बार भी भारत सरकार राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए आर्थिक सहायता भेज रही है. इसके लिए हम प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं.”

इस बीच, नेपाल सेना देविघाट को गुल्ची के रास्ते काठमांडू से जोड़ने के लिए 57.5 मीटर लंबा और 70 टन क्षमता वाला लोहे का पुल बना रही है.

फ्लैश फ्लड में यह पुल बह गया था, जिससे सड़क संपर्क टूट गया और देविघाट व आसपास के इलाकों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा.

नेपाल सेना की ब्रिजिंग यूनिट के ब्रिज कमांडर मेजर चिरंजीवी चौलागाईं ने से कहा, “आज हम पुल के लिए रोलर लेआउट सिस्टम तैयार करेंगे. कल सुबह से पुल स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा.”

उन्होंने बताया कि पुल का निर्माण अगले पांच दिनों में पूरा होने की उम्मीद है.

उधर, काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल की मोर्चरी के बाहर अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में लोगों की भीड़ जुट रही है.

रसुवा जिले में सामान पहुंचाने गए एक लापता व्यक्ति के रिश्तेदार ने को बताया कि वापसी के दौरान वाहन खराब हो गया था. उसे त्रिशूली के पास एक गैराज में मरम्मत के लिए खड़ा किया गया था. इसी दौरान अचानक भीषण बाढ़ आ गई और तब से उसका कोई पता नहीं चल पाया है.

उन्होंने कहा, “मैं कल भी यहां आया था और उससे पहले भी. एम्बुलेंस और अन्य वाहनों से लाए गए शव भी देखे, लेकिन उनमें से किसी की पहचान नहीं हो सकी.”

डीएससी