विदेश मंत्री जयशंकर और जर्मन सांसद हार्ड्ट ने पश्चिम एशिया, यूक्रेन विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर की चर्चा

नई दिल्ली, 14 अगस्त . भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में जर्मन सांसद जर्गन हार्ड्ट से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया, यूक्रेन और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.

इस बातचीत के दौरान बैठक में जर्मनी के भारत में नए राजदूत जैस्पर वीक भी मौजूद थे. इसके अलावा बैठक में हार्ड्ट बुंडेस्टाग में सीडीयू/सीएसयू संसदीय समूह के विदेश नीति प्रवक्ता भी शामिल रहे.

बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सीडीयू-सीएसयू के विदेश नीति प्रवक्ता जर्गन हार्ड्ट से मिलकर खुशी हुई. हमारी बातचीत में खाड़ी, पश्चिम एशिया, यूक्रेन और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी से जुड़े हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा हुई.”

जर्मनी यूरोप में भारत के सबसे अहम साझेदारों में से एक है. भारत उन पहले देशों में था जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1951 में जर्मनी के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. इस साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 साल पूरे हो रहे हैं.

भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी 21वीं सदी में भारत-जर्मन साझेदारी के लिए एजेंडा पर आधारित है. इसे मई 2000 में अपनाया गया था और बाद में संयुक्त घोषणाओं के जरिए इसे अपडेट किया गया, जैसे 2022 का प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौता.

इसकी जानकारी जर्मन संघीय विदेश कार्यालय के बयान में दी गई है. गुरुवार को जैस्पर वीक ने कहा कि वह भारत और जर्मनी की दोस्ती को नए स्तर पर ले जाने के लिए “मैचमेकर, सक्षमकर्ता और उत्प्रेरक” के रूप में काम करना चाहते हैं.

एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में जैस्पर वीक ने छात्र के तौर पर भारत की अपनी पहली यात्रा को याद किया. इसके बाद उन्होंने जर्मन दूतावास में उप मिशन प्रमुख के रूप में भी काम किया. उन्होंने नई दिल्ली में दूतावास की टीम से मुलाकात का भी जिक्र किया और उन्हें मिशन द्वारा किए जाने वाले कामों के पीछे की असली ताकत बताया.

वीडियो में वीक ने कहा, “मेरे लिए भारत आना घर आने जैसा है. मैं भारत का पुराना दोस्त हूं. मैं पहली बार 35 साल पहले भारत आया था. तब मैं छात्र था और देश और यहां के लोगों से मिलकर मैं तुरंत रोमांचित हो गया था. कई साल बाद, कॉर्डुला के साथ मैं जर्मन दूतावास के उप प्रमुख के रूप में भारत वापस आया. उन सालों की हमारी बहुत अच्छी यादें हैं और अब हम फिर यहां हैं. हम अभी-अभी बर्लिन से आए हैं. अपने पहले दिन ही मैंने दूतावास की पूरी टीम से मुलाकात की. ये लोग ही हमारे कामकाज की असली ताकत हैं.”

उन्होंने कहा कि उनके लिए जर्मनी के भारत में राजदूत के रूप में सेवा करना सम्मान की बात है. उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी में भारतीय प्रवासी समुदाय बढ़ रहा है, वहीं भारत में जर्मन निवेश भी लगातार बढ़ रहा है.

वीक ने कहा, “आने वाले हफ्तों में अपने क्रेडेंशियल्स दिखाने के बाद, मैं एक मैचमेकर, एक इनेबलर और एक कैटलिस्ट के तौर पर काम करना चाहता हूं ताकि भारत-जर्मनी की दोस्ती को एक नए स्तर पर ले जाया जा सके. हम हर दिन अपने देशों के बीच नए पुल बना रहे हैं. जर्मनी में भारतीय दूतावास बढ़ रहा है क्योंकि भारत में जर्मन निवेश बढ़ रहा है. इस बदलते समय में, भारत में जर्मन राजदूत के तौर पर, पूरी एम्बेसी टीम और देश भर में हमारे चार जनरल कॉन्सुलेट के साथ काम करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है.”

केके/पीएम