
नई दिल्ली, 11 अगस्त . बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सीकरी ने कहा कि उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और पीएम तारिक रहमान की मुलाकात दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए अच्छी शुरुआत है. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा चाहता है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र, शांति और स्थिरता बनी रहें. उन्होंने युनूस सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में हुए फेरबदल को देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि तारिक रहमान सरकार को पुरानी स्थिति बहाल करनी चाहिए.
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सीकरी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान और वर्तमान राजदूत दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात को लेकर कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि हमारे उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात पीएम तारिक रहमान से हुई है. उन्हें ढाका गए हुए लगभग दो महीने हो गए. यह मुलाकात पहली बार हो रही है. इसमें काफी वक्त लगा, लेकिन अच्छा है. हमारे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जैसा बताया है, उस हिसाब से चर्चा भी सकारात्मक रही है.”
शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के बयान को लेकर पूर्व डिप्लोमैट सीकरी ने कहा कि उन्हें पता है कि शेख हसीना ने खुद कहा है कि वो बांग्लादेश जाना चाहती हैं. एक बार उन्होंने कह दिया कि वो वापस जाना चाहती हैं, तो फिर से प्रत्यर्पण की बात को दोहराने का मतलब नहीं है. उनकी वापसी का इंतजाम होना चाहिए. उन्हें जो मृत्युदंड दिया गया है, उसके खिलाफ अपील करना चाहती हैं. वो कानूनी प्रक्रिया में शामिल होना चाहती हैं. ये अच्छी बात है कि सारी चीजें लोकतांत्रिक तरीके से पूरी हों.
वीणा सीकरी ने कहा कि भारत हमेशा से चाहता है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र रहे, शांति और स्थिरता रहे, संप्रभुता रहे. इसलिए हम उनके साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध मजबूत करना चाहते हैं, लेकिन मुहम्मद युनूस की 18 महीने की सरकार के दौरान उन्होंने काफी फेरबदल किया. इससे देश के लोगों को काफी नुकसान हुआ था. कई फैक्ट्री बंद हो गई. अभी भी सैकड़ों महिलाओं की नौकरियां चली गईं, और अब तक वापस नहीं मिली है. बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है.
वीणा सीकरी ने कहा, “भारत अपनी तरफ से बांग्लादेश की मदद करने के लिए तैयार है. सारे एक्सपोर्ट्स लगातार हो रहे हैं. बांग्लादेश की तरफ से डीजल को लेकर अपील की गई थी, जिसकी एक बार पूर्ति कराई गई. अब फिर से मांग की गई है. बांग्लादेश की तरफ से भी इस बात को समझा जाना चाहिए कि ताली दो हाथों से बजती है. मुहम्मद युनूस ने जो बदलाव किए थे, उसे तारिक रहमान सरकार को पुरानी स्थिति में लाना चाहिए, ताकि दोनों देशों के बीच स्थिति मजबूत हो जाए.”
भारत और बांग्लादेश सीमा को लेकर उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी की सरकार में सेंसिटिव सिलीगुड़ी कॉरिडोर एरिया में, फेंसिंग पूरी करने के लिए जरूरी जमीन नहीं दी गई थी. हालांकि, अब जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी बने हैं, तो उन्होंने सबसे पहले जमीन दी है, और बॉर्डर पर फेंसिंग का काम चल रहा है. ये देश की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है. हमारी सरकार कई सालों से बॉर्डर पर फेंसिंग पूरी करने की कोशिश कर रही है.”
बांग्लादेश ने अब तक भारत के साथ बातचीत के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. उन्होंने व्यापार, जुड़ाव, और सुरक्षा समेत किसी भी मुद्दे पर डायलॉग के लिए कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. एक बीएसएफ और बीजीबी के स्तर पर डायलॉग जरूर हुआ. हमारे तरफ से पीएम तारिक रहमान के लिए दो न्योते गए हैं. एक सबसे पहले जब वो पीएम बने थे, तब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें न्योता दिया था कि आप भारत आइए, और उनका आश्वासन था कि वो पहले भारत आएंगे, लेकिन वो नहीं आए. अब फिर भारत सरकार ने ब्रिक्स समिट के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए एक निमंत्रण दिया है. बांग्लादेश बिंम्सटेक का चेयरमैन है, तो उस भूमिका में वो ब्रिक्स समिट के आउटरीच सत्र में शामिल हों.
उन्होंने आगे कहा कि बिम्सटेक के लिए जब वो आएंगे, तो द्विपक्षीय दौरा होगा ही, लेकिन अब तक बांग्लादेश की तरफ से कोई कन्फर्मेशन नहीं मिला है. मुझे हैरानी है कि भारतीय राजदूत के साथ मीटिंग के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की तरफ से जो बायन पढ़े गए, उसमें इस न्योते का कोई जिक्र ही नहीं है.
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केके/डीकेपी