भारतीय खेल का भविष्य एथलीटों, संघों और सरकारों के बीच मजबूत समन्वय पर निर्भर: मांडविया

नई दिल्ली, 7 मई . केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को कहा कि नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन कॉन्क्लेव 2026, अगले दशक में होने वाली बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए भारत की तैयारियों को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक अहम कदम है.

इस कॉन्क्लेव में 37 नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के अधिकारी एक साथ आए, जिनमें इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन भी शामिल था. इन अधिकारियों ने भारत के खेल रोडमैप और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, एशियन गेम्स 2026 और समर ओलंपिक 2028 जैसे आयोजनों के लिए रणनीतियों पर चर्चा की.

सभा को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा, “नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन कॉन्क्लेव, आने वाले वैश्विक खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारी की दिशा में एक समन्वित कदम है.”

मंत्री ने केंद्र सरकार के उस विजन पर जोर दिया जिसके तहत भारत को वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रणालियों, एथलीट्स के दीर्घकालिक विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे और शीर्ष एथलीट्स के लिए निरंतर सहायता तंत्र के माध्यम से एक प्रमुख खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जाना है.

संस्थागत सुधारों और हितधारकों के बीच मजबूत समन्वय की जरूरत पर प्रकाश डालते हुए मांडविया ने कहा, “भारत का खेल भविष्य एथलीट्स, फेडरेशन और सरकारों के बीच मजबूत समन्वय पर निर्भर करता है.”

केंद्रीय खेल मंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि एथलीट्स का कल्याण सभी प्रशासनिक निर्णयों के केंद्र में होना चाहिए. उन्होंने फेडरेशनों से अपील की है कि वे शासन प्रणालियों को मजबूत करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर चुनाव सुनिश्चित करें. मांडविया ने कहा, “एथलीट्स का कल्याण और एथलीट-केंद्रित शासन हर फेडरेशन का मुख्य फोकस होना चाहिए.”

मनसुख मांडविया ने खेलों में डोपिंग से निपटने के लिए सरकार के संकल्प को भी दोहराया, जिसके लिए जागरूकता अभियान, शिक्षा कार्यक्रम और सख्त प्रवर्तन उपायों का सहारा लिया जाएगा.

मांडविया ने कहा, “भारतीय खेल इकोसिस्टम से डोपिंग को पूरी तरह खत्म करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है.” उन्होंने फेडरेशनों, कोचों और सहायक कर्मचारियों से एक स्वच्छ खेल वातावरण को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया. उन्होंने ‘खेलो इंडिया’, ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और आने वाले ‘खेलो भारत मिशन’ जैसी पहलों पर भी प्रकाश डाला.

केंद्रीय खेल मंत्री ने भविष्य के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की पदक जीतने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में खेल विज्ञान, अधिक प्रतिस्पर्धी अनुभव, पेशेवर लीग, अकादमियों और निजी क्षेत्र की भागीदारी के महत्व के बारे में भी बात की. इस कॉन्क्लेव के दौरान, ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 के नियम और सुधार दिशानिर्देशों’ वाली हैंडबुक को औपचारिक रूप से जारी किया गया.

युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने एक मजबूत खेल ढांचा तैयार करने में विज्ञान-आधारित प्रशिक्षण और दीर्घकालिक योजना के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और 2028 के ओलंपिक की ओर भारत की यात्रा प्रदर्शन से प्रेरित होगी, विज्ञान की शक्ति से संचालित होगी और मजबूत महासंघों पर आधारित होगी.”

इस सम्मेलन में भारत के विकसित हो रहे खेल संबंधी रोडमैप पर भी केंद्रित चर्चाएं हुईं, जिनमें खेलो इंडिया मिशन मेडल रणनीति, खेल सामग्री निर्माण को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक फिटनेस प्रोटोकॉल और एथलीट मूल्यांकन, डोपिंग विरोधी कानूनों को मजबूत करना, राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए तकनीकी क्रियाकलाप, एनएसजी अधिनियम 2025 के तहत शासन और अनुपालन, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने और वैश्विक महासंघों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की भारत की महत्वाकांक्षा, साथ ही आगामी खेल आयोजनों के लिए रणनीतिक तैयारी शामिल हैं.

आरएसजी