
पणजी, 30 अक्टूबर . गोवा सरकार ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के लिए विधानसभा में राजनीतिक आरक्षण को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से Supreme Court का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है. यह निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ द्वारा एसटी आबादी के अनुमानित आंकड़ों से संबंधित अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद लिया गया.
इस संबंध में शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कानूनी प्रभावों पर चर्चा की गई और एसटी समुदाय की लंबे समय से लंबित राजनीतिक आरक्षण की मांग को सुरक्षित रखने के लिए आगे की रणनीति तय की गई.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब आदिवासी नेताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने राजनीतिक आरक्षण लागू होने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है. बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा एसटी आबादी के अनुमान से जुड़ी अधिसूचना पर रोक लगाए जाने के बाद समुदाय में चिंता बढ़ गई है.
बैठक में गोवा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. गणेश गांवकर, जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर, महाधिवक्ता देविदास पंगम, गोवा भाजपा अध्यक्ष दामू नाइक, अधिवक्ता नरेंद्र सावईकर तथा एसटी समुदाय के कई प्रमुख नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए.
विस्तृत चर्चा के बाद बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मामले को Supreme Court में ले जाया जाएगा और एसटी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण देने की प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे.
पहले कदम के रूप में जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा. यह प्रतिनिधिमंडल भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात करेगा और हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कानूनी प्रभावों पर चर्चा करते हुए आगे की कानूनी रणनीति पर मार्गदर्शन मांगेगा.
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने दोहराया कि उनकी सरकार गोवा विधानसभा में एसटी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार केंद्र सरकार के समक्ष इस मांग को उठाती रही है और आगे भी कानूनी अड़चनों को दूर करने तथा समुदाय के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले एसटी समुदाय की इस लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
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एएमटी/वीसी