
मुंबई, 17 सितंबर . मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन से चल रही अपनी भूख हड़ताल गुरुवार को खत्म कर दी. इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहत और संतोष जताया है.
मीडिया से बात करते हुए सीएम फडणवीस ने इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सरकार ने शांतिपूर्ण तरीके से गतिरोध खत्म करने के लिए लगातार बातचीत की थी.
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमें खुशी है कि मनोज जरांगे पाटिल ने अपना अनशन वापस ले लिया है. हमने उनसे इसके लिए आग्रह किया था. उनकी 13 मांगों में से 12 को सरकार ने मान लिया है. एक मांग कानूनी अड़चनों की वजह से पूरी नहीं हो सकी, जिसके बारे में उन्हें बता दिया गया है.”
फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि कैबिनेट सब-कमेटी ने जो वादे किए हैं, उन्हें सख्ती से पूरा किया जाएगा. राज्य सरकार इन वादों को लागू करने के लिए जरूरी बैठकें करेगी और प्रशासनिक कदम उठाएगी.
उन्होंने मराठा समुदाय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि हमारे दरवाजे खुले हैं और दावा किया कि मराठा समुदाय के कल्याण के लिए जितने ठोस फैसले इस सरकार ने लिए हैं, उतने पहले किसी सरकार ने नहीं लिए.
सीएम पडणवीस ने इस आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म कराने में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि आने वाले त्योहारों में कोई खलल डाले बिना आंदोलन खत्म हो गया.
इससे पहले गुरुवार को बीड जिले के पाटोदा में जरांगे पाटिल ने सरकारी प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के बाद 20 दिन से चल रहा अनशन स्थगित करने का ऐलान किया. प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, दादाजी भुसे, विधायक प्रसाद लाड, सुरेश धस और बीड के जिलाधिकारी शामिल थे.
बातचीत के बाद जरांगे पाटिल ने सरकार को सातारा गजट लागू करने के लिए 90 दिन यानी तीन महीने की मोहलत दी है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने धोखा दिया तो वे मुंबई कूच करेंगे.
अनशन स्थगित करने का ऐलान करते हुए उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और जब तक सफलता नहीं मिलती, लड़ाई नहीं रुकेगी. तीन महीने का अल्टीमेटम देते हुए उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को नाराज करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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वीकेयू/पीएम