रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सरकार ने गुजरात और महाराष्ट्र में नई रेल परियोजनाओं को दी मंजूरी

नई दिल्ली, 17 जून . रेल क्षमता बढ़ाने और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में आदिपुर-भुज दोहरीकरण परियोजना को 493 करोड़ रुपए की लागत से मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही महाराष्ट्र में पनवेल जंक्शन पर भीड़ कम करने के लिए 172 करोड़ रुपए की लागत वाली सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन परियोजना को भी स्वीकृति दी गई है. यह जानकारी बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई.

बयान के अनुसार, गुजरात में 49 किलोमीटर लंबी दोहरी रेल लाइन परियोजना के पूरा होने के बाद इस मार्ग पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन दो अतिरिक्त यात्री ट्रेनें चलाई जा सकेंगी. इसके अलावा आदिपुर-भुज सेक्शन पर हर साल लगभग 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई भी संभव होगी.

यह परियोजना भारतीय रेलवे के क्षमता विस्तार कार्यक्रम के तहत स्वीकृत की गई है. रेलवे देश भर में दोहरीकरण, तिहरीकरण और अन्य नेटवर्क विस्तार कार्यों के जरिए भविष्य में बढ़ने वाले यात्री और माल यातायात की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी कर रहा है.

वर्तमान में आदिपुर-भुज सेक्शन गांधीधाम-नालिया कॉरिडोर का सिंगल-लाइन रेल मार्ग है. क्षेत्र में चल रही कई रेल परियोजनाओं के कारण यहां आने वाले समय में यातायात में काफी वृद्धि होने की संभावना है. इन परियोजनाओं में भुज-नालिया गेज परिवर्तन, नालिया-वायोर रेल लाइन का विस्तार तथा नालिया-जखाऊ, वायोर-लखपत और देशलपर-लूना के बीच नई रेल लाइनों का निर्माण शामिल है.

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भुज-आदिपुर सेक्शन पर यात्री और माल यातायात, दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इसी को ध्यान में रखते हुए इस रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है, ताकि भविष्य की मांग के अनुरूप पर्याप्त क्षमता उपलब्ध कराई जा सके और परिचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.

इसी तरह मध्य रेलवे के अंतर्गत 172 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली 3.7 किलोमीटर लंबी सोमटणे-चिखली कॉर्ड लाइन परियोजना करजात मार्ग के चिखली और रोहा मार्ग के सोमटणे के बीच लंबे समय से गायब महत्वपूर्ण रेल संपर्क को पूरा करेगी.

इस नई लाइन के बनने से करजात और रोहा कॉरिडोर के बीच सीधे रेल संपर्क की सुविधा मिलेगी. ट्रेनों को अब पनवेल जंक्शन में प्रवेश करने या इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी.

पनवेल मुंबई क्षेत्र का सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन माना जाता है. यहां रोहा, जेएनपीटी, करजात और दीवा समेत चार प्रमुख दिशाओं से रेल यातायात आता है.

वर्तमान में करजात और रोहा मार्गों के बीच सीधा रेल संपर्क नहीं होने के कारण ट्रेनों को पनवेल जंक्शन से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे परिचालन संबंधी समस्याएं और भीड़ बढ़ती है.

नई कॉर्ड लाइन बनने के बाद दोनों मार्ग सीधे जुड़ जाएंगे, जिससे ट्रेन संचालन अधिक सुगम होगा और रेलवे नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ेगी.

इस नई लाइन के शुरू होने के बाद हर साल लगभग 90 लाख टन अतिरिक्त माल यातायात को संभालने की क्षमता विकसित होगी.

इसके अलावा प्रत्येक मालगाड़ी का लगभग 110 मिनट का समय बचेगा, जिससे माल परिवहन की गति और लॉजिस्टिक्स दक्षता में बड़ा सुधार होगा.

यह परियोजना विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (जेएनपीए) से जुड़े माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है. जेएनपीए देश के लगभग 60 प्रतिशत कंटेनर यातायात को संभालता है.

वर्तमान में करजात, जसई और रोहा मार्गों के बीच चलने वाली मालगाड़ियों को पनवेल जंक्शन पर आकर इंजन बदलना पड़ता है. नई कॉर्ड लाइन शुरू होने के बाद मालगाड़ियां सीधे पनवेल को बायपास कर सकेंगी, जिससे परिचालन में बड़ा लाभ मिलेगा.

भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश के इंदौर यार्ड में स्थित रोड ओवर ब्रिज (आरओबी), जिसे शास्त्रीय ब्रिज के नाम से जाना जाता है, के पुनर्निर्माण को भी मंजूरी दे दी है, जिस पर 139 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. यह पुल शहर की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाएगा और रेल तथा सड़क संपर्क को मजबूत करेगा.

यह परियोजना रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा और यातायात सुगमता बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे के रोड ओवर ब्रिज, रोड अंडर ब्रिज और अन्य बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों के तहत स्वीकृत की गई है.

डीबीपी