राजा रघुवंशी हत्याकांड: आरोपी सोनम की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई 21 जुलाई तक टली

नई दिल्ली, 14 जुलाई . इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले मे आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ दाखिल मेघालय सरकार की याचिका पर Supreme Court में सुनवाई टल गई. अब 21 जुलाई को अगली सुनवाई होगी.

पिछली सुनवाई के दौरान Supreme Court ने सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने Supreme Court से कहा था कि सोनम रघुवंशी को केवल इस आधार पर जमानत दे दी गई कि गिरफ्तारी की धारा टाइपोग्राफिकल मिस्टेक की वजह से गलत लिख दी गई थी.

इससे पहले 3 जुलाई को Supreme Court ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि सोनम जमानत पर पहले ही रिहा हो चुकी है. अदालत ने कहा था कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे सुनवाई की आवश्यकता है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं. पहले भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं और यह मामला केवल गिरफ्तारी के दौरान हुई एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती का नहीं है. मेघालय सरकार का तर्क है कि यदि सोनम बाहर रही तो उसके फरार होने का खतरा बना रहेगा.

सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए. पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था. इस पर Supreme Court ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?

इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने Supreme Court में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था. सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है. मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलांग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी. अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था.

ओपी/वीसी