
शिमला, 11 जुलाई . हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य सरकार के अधीन आने वाले मंदिरों की सुरक्षा और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है. भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने सभी संबंधित मंदिर प्रबंधनों को पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
नई एसओपी के अनुसार सभी दानपात्र (हुंडी) छेड़छाड़-रोधी होंगे और उन्हें सुरक्षित तरीके से स्थापित किया जाएगा. प्रत्येक दानपात्र को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी तथा डबल लॉक या मल्टी-की प्रणाली लागू होगी. दानपात्र खोलने और बंद करने से संबंधित प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी अनिवार्य रूप से रखा जाएगा.
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि दानपात्र केवल पूर्व निर्धारित तिथियों पर ही खोले जाएंगे. इस दौरान मंदिर अधिकारियों, जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों, लेखा अधिकारियों, मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी अनिवार्य होगी. चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होगी और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी.
एसओपी के तहत मंदिर परिसरों में उच्च गुणवत्ता वाले नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग सुविधा से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं. ये कैमरे प्रवेश और निकास द्वार, गर्भगृह के आसपास, दानपात्र, गिनती कक्ष और स्ट्रॉन्ग रूम को कवर करेंगे. सभी सीसीटीवी फुटेज कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी.
वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं. मंदिरों में प्राप्त नकद चढ़ावे को एक कार्य दिवस के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा. मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में नकदी रखने पर रोक रहेगी, जब तक कि इसके लिए पूर्व लिखित अनुमति न ली गई हो. श्रद्धालुओं को डिजिटल माध्यमों से दान देने के लिए यूपीआई, क्यूआर कोड और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए गए हैं.
एसओपी के अनुसार मंदिरों के आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं का हर तीन महीने में भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जबकि वर्ष में एक बार सरकार द्वारा नामित एजेंसियों से ऑडिट कराया जाएगा. नकदी और कीमती सामान संभालने वाले कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा तथा समय-समय पर उनकी जिम्मेदारियां भी बदली जाएंगी. संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश के लिए सख्त नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी.
सरकार ने भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया है. सभी राज्य प्रबंधित मंदिरों को 30 दिनों के भीतर एसओपी के अनुपालन की रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी स्थापना, ऑडिट की स्थिति और लागू किए गए अन्य प्रबंधों की जानकारी देनी होगी. इसके अलावा सभी जिला उपायुक्तों को अपने अधिकार क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था लागू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एसओपी का पालन नहीं करने या लापरवाही बरतने की स्थिति में कार्यकारी अधिकारियों और मंदिर प्रबंधन समितियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
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डीकेएम/एबीएम