हिंदी दिवस : अजीत भारती बोले-क्रिया और कारक न बदले तब तक हिंदी भाषा में मिलावट गलत नहीं

नई दिल्ली, 14 सितंबर . राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर पत्रकार, लेखक और साहित्यकार अजीत भारती ने से बातचीत में हिंदी भाषा के विकास और महत्व के बारे में अपनी राय दी.

क्लासिक हिंदी और आधुनिक हिंदी में अंतर पर अजीत भारती ने कहा, “किसी भी भाषा का स्वाभाविक विकास वही होता है कि आपको क्या मिल रहा है और आप से दूसरी भाषाओं में क्या जा रहा है? इसकी एक ग्राह्यता होनी चाहिए, तभी हिंदी भाषा विकसित होगी और दूसरे लोगों को स्वीकार होगी. अब हम उस पीढ़ी में हैं, जहां पर कई भाषाओं तक बच्चों की पहुंच है. टीवी, ओटीटी और आपसी वार्तालाप के माध्यम से यह देखने को मिल रहा है. अगर हम क्लासिक हिंदी के समय के देखें तो उस वक्त हिंदी भाषी लोग थे, वह हिंदी भाषी ही थे और अंग्रेजी का अधिक प्रभाव नहीं था. उस समय उर्दू भी एक भाषा के रूप में मानी जाती थी. हिंदी में उर्दू का मिश्रण कहीं न कहीं फिल्मों और उनके लेखकों की देन है. 1970 के आसपास जब अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ा और हमारे समाज का ध्यान गया, तो अंग्रेजी शब्दों का हिंदी में समावेश होने लगा.”

रोमन हिंदी के बढ़ते चलन पर अजीत भारती ने कहा, “रोमन हिंदी के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण एसएसएम (लघु संदेश सेवा) है. जब 2000 में मोबाइल आया, उसमें हिंदी कीबोर्ड नहीं होते थे. ऐसे में लोग एक दूसरे को संदेश भेजने के लिए रोमन हिंदी का प्रयोग करते थे. तभी से रोमन हिंदी का चलन बढ़ा. 2010 के बाद मोबाइल में हिंदी टाइपिंग वाला कीबोर्ड चलन में आया.”

अजीत भारती ने कहा कि हिंदी में अंग्रेजी, उर्दू, स्थानीय बोलियों और इंटरनेट स्लैंग के शब्द तेजी से शामिल होने को मैं बुरा तब तक नहीं मानता, जब तक हिंदी की क्रियाएं और कारक चिह्न का बदलाव न होने लगे. जब ऐसा होने लगेगा, तब भाषा क्षरण होने लगेगी. इससे पहले यह भाषा के विकास का मार्ग ही है और अच्छा है. इससे हिंदी भी समृद्ध हो रही है और दूसरी भाषाओं में हिंदी के शब्द जुड़ रहे हैं.”

‘शुद्ध हिंदी’ को लेकर भारती ने कहा, “तत्समनिष्ठ भाषा वाली शुद्ध हिंदी मानी जाएगी. हम जितना लिख सकते हैं, उतना शुद्ध हिंदी लिखते रहें लेकिन बोलचाल में ऐसा संभव नहीं है. कुछ लोग हैं, जो शुद्ध भाषा के साथ साहित्य की रचना करते हैं. मैं चाहता हूं कि जो लोग ऐसा लिख रहे हैं, वैसा ही करते रहें. हालांकि मिश्रण भाषा में भी जो किताबें या इंटरनेट पर जो लिखा जा रहा है, वह भी मेरे लिए स्वीकार्य है.”

अजीत भारती ने कहा कि इस समय डिजिटल दौर में देवनागरी में लिखने का प्रचलन बढ़ा है. जिन्हें देवनागरी में लिखने नहीं आता, वह भी एआई की मदद से लिख रहा है. हिंदी भाषी क्षेत्रों में सीबीएसई बोर्ड में 10वीं तक हिंदी पढ़ाई जानी चाहिए. हालांकि मैं किसी भी क्षेत्र में हिंदी भाषा को थोपने के विरोध में हूं. अन्य राज्यों को भी हिंदी जाननी चाहिए.”

भारती ने कहा, “कई किताबों और फिल्मों में भी गाली का प्रयोग किया गया है. हालांकि मैं गाली का समर्थन नहीं करता हूं लेकिन समाज में इसका स्थान है. अगर आप वास्तविक संवाद साहित्य में लिखेंगे तो सड़कों पर बोली जाने वाली भाषा लिखनी पड़ेगी.”

सोशल मीडिया में हिंदी भाषा के इस्तेमाल और बढ़ते चलन को लेकर अजीत भारती ने कहा, “भाषा का विस्तार तभी होता है, जब उसका लोकतांत्रिकरण होगा, तभी नए शब्द जुड़ेंगे. हमें अत्यधिक कठिन भाषा के इस्तेमाल से बचना चाहिए, तभी लोग स्वीकार करेंगे. अब सही हिंदी का निर्धारण समाज के लोग खुद करते हैं. अब हिंदी भाषा के नियंत्रण में नहीं है. हिंदी लेखन में अंग्रेजी भाषा के अधिक मिश्रण को रोकना वर्तमान में बड़ी चुनौती है.”

ओपी/पीएम